नक्सली हिंसा के शिकार ग्रामीणों ने लगाई न्याय की गुहार, राज्यपाल से की मुलाकात

गुरुवार को कांकेर और बीजापुर के आदिवासी ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला। ये सभी लोग नक्सली हिंसा के शिकार रहे हैं—किसी ने अपनी आंखें खोईं, तो किसी ने टांगे। पीड़ितों ने राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें लिखा था कि नक्सलियों ने उनकी जिंदगी को बर्बाद कर दिया है। ग्रामीणों की मांग थी कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, उन्हें किसी भी सूरत में छोड़ा न जाए।

प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी पीड़ितों का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी मांग पूरी तरह से जायज़ है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने माओवादियों के खिलाफ कार्रवाई की जो मांग रखी है, वह पूरी की जाएगी।

सरकार का रुख स्पष्ट: अब नरमी नहीं, सख्ती

हाल ही में कुछ संगठनों ने नक्सलियों और सरकार के बीच वार्ता की पेशकश की है। लेकिन बीजापुर जैसे क्षेत्रों में सरकार द्वारा जारी सख्त कार्रवाई यह संकेत दे रही है कि अब सरकार माओवादियों के प्रति नरमी नहीं, बल्कि निर्णायक कार्रवाई के मूड में है।

प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा ने भी वार्ता की पेशकश करने वालों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये लोग तब कहां थे जब नक्सलियों ने 76 जवानों की शहादत दी या जब झीरम घाटी में हमला हुआ? उन्होंने स्पष्ट किया कि अब नक्सलवाद को खत्म करने का समय आ गया है, न कि उसे सहानुभूति देने का।