बोड़ार की दो स्वच्छता दीदियों ने बदली गांव की तस्वीर

पूनम और जयकुंवर की मेहनत से घर-घर कचरा संग्रहण को मिली रफ्तार, स्वच्छता को लेकर ग्रामीणों में आया बदलाव
कोरिया। वनांचल क्षेत्र के सोनहत जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बोड़ार में स्वच्छता को लेकर दो स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने मिसाल कायम की है। ग्राम विक्रमपुर की रहने वाली पूनम और जयकुंवर पिछले एक वर्ष से लगातार गांव में स्वच्छता के लिए काम कर रही हैं। उनकी मेहनत और निरंतर प्रयासों का असर अब पूरे गांव में दिखाई देने लगा है। ग्रामीणों में स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ी है और कचरा प्रबंधन को लेकर सामूहिक जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत हुई है।
इन दोनों महिलाओं ने न केवल घर-घर से कचरा संग्रहण का जिम्मा संभाला, बल्कि ग्रामीणों को स्वच्छता के प्रति नियमित रूप से जागरूक भी किया। उनकी पहल से गांव की गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा कम हुआ है तथा स्वच्छ वातावरण को लेकर लोगों में अनुशासन विकसित हुआ है।
संकोच को पीछे छोड़ उठाया जिम्मेदारी का बीड़ा
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत बोड़ार में घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था शुरू की जानी थी। इस कार्य से जुड़ने को लेकर शुरुआत में कई महिलाओं ने सामाजिक और पारिवारिक संकोच के कारण दूरी बनाए रखी। ऐसे समय में पूनम और जयकुंवर आगे आईं और गांव की स्वच्छता की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार हो गईं।
शुरुआत आसान नहीं थी। इस काम को लेकर उन्हें कई तरह की बातें भी सुननी पड़ीं, लेकिन दोनों महिलाओं ने अपने फैसले से पीछे हटने के बजाय पूरी निष्ठा के साथ काम जारी रखा। लगातार मेहनत का परिणाम यह रहा कि जिस काम को लेकर शुरुआत में झिझक थी, वही आज गांव में सम्मान और पहचान का कारण बन गया है।
हर तीसरे दिन घर-घर पहुंचता है स्वच्छता का संदेश
ग्राम पंचायत बोड़ार को स्वच्छ भारत मिशन के तहत ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। अब गांव में स्वच्छता व्यवस्था को बनाए रखने के लिए नियमित रूप से घर-घर कचरा संग्रहण किया जा रहा है।
पूनम और जयकुंवर कचरा संग्रहण वाहन के साथ गांव के अलग-अलग मोहल्लों में पहुंचती हैं। हर तीसरे दिन घरों और दुकानों से कचरा एकत्र कर उसे ग्राम पंचायत के बाहर बनाए गए कचरा संग्रहण केंद्र तक पहुंचाया जाता है। वहां कचरे का पृथक्करण किया जाता है।
लगातार चल रहे इस अभियान का असर अब ग्रामीणों की आदतों में भी नजर आने लगा है। लोग सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने के बजाय उसे घर या दुकान में निर्धारित स्थान पर एकत्र करने लगे हैं और स्वच्छता दीदियों को सौंप रहे हैं।
लगातार प्रयासों से बदली ग्रामीणों की सोच
स्वच्छता कार्य से जुड़ी पूनम और जयकुंवर बताती हैं कि शुरुआत में कई ग्रामीण कचरा देने में रुचि नहीं लेते थे। कुछ लोग घर का कचरा बाहर सड़क पर ही डाल देते थे। ऐसे में दोनों ने लोगों को समझाने के लिए लगातार जनसंपर्क किया और कचरा संग्रहण का काम बिना रुके जारी रखा।
धीरे-धीरे ग्रामीणों को उनकी मेहनत और उद्देश्य समझ में आने लगा। लोगों का भरोसा बढ़ा और अब गांव के अधिकांश परिवार तथा दुकानदार अपने घरों और प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे को व्यवस्थित तरीके से एकत्र कर स्वच्छता दीदियों को सौंप रहे हैं।
मेहनत बनी सम्मान की पहचान
आज बोड़ार में स्वच्छता की चर्चा होती है तो पूनम और जयकुंवर का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। जिस काम को शुरू करने के दौरान उन्हें सामाजिक संकोच और कई तरह की टिप्पणियों का सामना करना पड़ा था, उसी काम ने उन्हें गांव में एक अलग पहचान दिलाई है।
स्वच्छता के प्रति उनके समर्पण और लगातार किए गए प्रयासों को जिला स्तर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में भी सम्मान मिल चुका है। दोनों महिलाओं ने यह साबित किया है कि बदलाव की शुरुआत छोटे स्तर से भी की जा सकती है, बशर्ते प्रयास निरंतर और उद्देश्य स्पष्ट हो।
बोड़ार में स्वच्छता को लेकर विकसित हुआ यह अनुशासन पूनम और जयकुंवर की मेहनत का परिणाम है। उनकी पहल अब गांव के लिए केवल स्वच्छता अभियान नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी और सकारात्मक बदलाव की मिसाल बन चुकी है।

