तुर्की-बांग्लादेश ड्रोन डील: भारतीय सीमा के पास तुर्की ड्रोन की तैनाती से बढ़ीं सुरक्षा चिंताएँ

ढाका/नई दिल्ली। दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। बांग्लादेश अपनी सेना के आधुनिकीकरण के तहत तुर्की से उन्नत सैन्य ड्रोन (Bayraktar TB2) खरीद रहा है। इन ड्रोनों की तैनाती भारतीय सीमा से महज 75 किलोमीटर दूर स्थित सैन्य बेस पर की जा रही है, जिसने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
हाल के वर्षों में तुर्की और बांग्लादेश के बीच सैन्य संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। भारत के चिकन नेक (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) और उत्तर-पूर्वी राज्यों के करीब इन आधुनिक हथियारों की मौजूदगी को भारतीय सुरक्षा विश्लेषक एक रणनीतिक चुनौती के रूप में देख रहे हैं।
मामले से जुड़े प्रमुख बिंदु:
ड्रोन बेड़े की तैनाती: तुर्की निर्मित ये लड़ाकू ड्रोन निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और सटीक हमले करने में सक्षम हैं। इन्हें भारतीय सीमा के बेहद करीब तैनात किया जा रहा है।
तुर्की-बांग्लादेश रक्षा समझौता: बांग्लादेश अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए ‘फॉरसेज गोल 2030’ (Forces Goal 2030) के तहत तुर्की से बड़े पैमाने पर सैन्य उपकरण और ड्रोन तकनीक हासिल कर रहा है।
भारत के लिए रणनीतिक चिंता: सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) भारत को उत्तर-पूर्वी राज्यों से जोड़ने वाला एक बेहद संवेदनशील इलाका है। सीमा के इतने करीब एडवांस्ड ड्रोन और सर्विलांस सिस्टम की मौजूदगी भारत की वायु रक्षा प्रणालियों के लिए नई चुनौती पेश करती है।
क्षेत्रीय संतुलन पर असर: चीन के बाद अब तुर्की का दक्षिण एशियाई मामलों और भारत के पड़ोसी देशों में बढ़ता सैन्य प्रभाव इस क्षेत्र के शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

