छत्तीसगढ़ में हरेली तिहार की छायी लोक-परंपराओं की रंगत, गांव से लेकर राजधानी तक गूंजा कृषि संस्कृति का उत्सव

छत्तीसगढ़ में गुरुवार को पारंपरिक त्योहार हरेली तिहार पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। राजधानी रायपुर से लेकर सुदूर गांवों तक हर ओर कृषि संस्कृति, लोक परंपराओं और ग्रामीण छवि की अनुपम झलक देखने को मिली।

🌾 मुख्यमंत्री निवास में पारंपरिक अंदाज़ में मना हरेली

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने निवास पर पारंपरिक विधियों से हरेली तिहार मनाया। इस अवसर पर उन्होंने कहा, “हरेली छत्तीसगढ़ की आत्मा है, जो हमें प्रकृति के प्रति सम्मान और धरती से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है।”

🌾 भूपेश बघेल ने चढ़ाई गेड़ी, निभाई परंपरा

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी अपने रायपुर स्थित निवास पर गेड़ी चढ़कर हरेली पर्व की खुशियां मनाईं। उन्होंने पारंपरिक पोशाक पहनकर खेत-खलिहानों और कृषि उपकरणों की पूजा की तथा गोसेवा भी की। हरेली तिहार पर उनका यह पारंपरिक अंदाज़ वर्षों से लोगों के बीच चर्चा में रहता है।

🌿 मंत्रियों ने भी मनाया पर्व

उपमुख्यमंत्री अरुण साव और मंत्री टंकराम वर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी अपने-अपने निवासों में हरेली पर्व पर हल-पूजा, बैल-पूजन और पारंपरिक व्यंजनों के साथ उत्सव का आयोजन किया। ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों ने गेड़ी चढ़कर और नीम झाड़ू लेकर हरेली की परंपरा निभाई।

🎶 लोक-संस्कृति से सजी राजधानी

मुख्यमंत्री निवास में पारंपरिक लोक यंत्रों की धुन और छत्तीसगढ़ी संस्कृति से सजे सुंदर नाचा का आयोजन किया गया। राउत नाचा, आदिवासी लोकनृत्य और छत्तीसगढ़ी संगीत की मधुर ध्वनि से परिसर उत्सवमय हो गया। इस आयोजन में राज्य का ग्रामीण जीवन, पारंपरिक परिधान और वाद्य यंत्रों की छटा देखते ही बन रही थी।

छत्तीसगढ़ की परंपराएं – हरेली पर्व में उपयोग में लाए गए पारंपरिक औजार और वस्तुएं:

काठा

लकड़ी से बनी गोलनुमा संरचना जिसे पुराने समय में धान मापने के लिए उपयोग किया जाता था। एक काठा में लगभग चार किलो धान आता है।

खुमरी

बांस की खपच्चियों से बनी, गुलाबी रंग में रंगी और कौड़ियों से सजी हुई छाया संरचना। चरवाहे सिर पर इसे पहनते थे – धूप और बारिश से बचाव हेतु।

कांसी की डोरी

‘कांसी’ पौधे के तनों से तैयार की गई मजबूत डोरी, जिसका प्रयोग खाट बुनने में होता है। इसे बनाने की प्रक्रिया को ‘डोरी आंटना’ कहा जाता है।

झांपी

बांस की लकड़ी से निर्मित ढक्कनयुक्त गोलनुमा संरचना। प्राचीन समय में यह बैग या पेटी की जगह उपयोग होती थी, खासकर विवाह जैसे आयोजनों में।

कलारी

बांस के डंडे के सिरे पर लोहे का हुक लगाकर बनाई गई संरचना, जिसका उपयोग धान को उलटने-पलटने में किया जाता है।