टाइगर रिजर्व में पर्यावरण पर बड़ा हमला: 1 लाख पेड़ काटे, 265 एकड़ जमीन पर कब्जा, ISRO की तस्वीरों में चौंकाने वाला खुलासा

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में एक संरक्षित टाइगर रिजर्व से सामने आई खबर ने पर्यावरण संरक्षण की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि रिजर्व के भीतर बड़े पैमाने पर अवैध कटाई कर करीब 1 लाख पेड़ों को खत्म कर दिया गया, जबकि 265 एकड़ जमीन पर कब्जा कर लिया गया। मामले का खुलासा तब हुआ जब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की सैटेलाइट तस्वीरों में जंगल के भीतर असामान्य बदलाव दिखे।

सैटेलाइट से खुली पोल

ISRO द्वारा जारी हाई-रिजॉल्यूशन इमेजरी में साफ नजर आया कि घने जंगल वाले इलाके तेजी से खाली होते जा रहे हैं। जहां पहले घना हरित क्षेत्र था, वहां अब बंजर जमीन और छिटपुट पेड़ ही दिखाई दे रहे हैं। शुरुआती जांच में सामने आया कि जिन इलाकों में करीब 1000 पेड़ होने चाहिए थे, वहां अब महज 20-25 पेड़ ही बचे हैं

‘गर्डलिंग’ से सूखाए गए पेड़

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि पेड़ों को सीधे काटने के बजाय Girdling’ तकनीक अपनाई गई। इस तरीके में पेड़ की छाल को चारों ओर से काट दिया जाता है, जिससे उसका पोषण रुक जाता है और वह धीरे-धीरे सूख जाता है। इससे कटाई को प्राकृतिक नुकसान जैसा दिखाने की कोशिश की जाती है।

265 एकड़ में अवैध कब्जा

वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक रिजर्व के भीतर बड़े हिस्से पर अवैध कब्जा कर खेती या अन्य गतिविधियां शुरू कर दी गई हैं। करीब 265 एकड़ क्षेत्र में जमीन को साफ कर उपयोग में लाया जा रहा है, जो वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

वन्यजीवों पर खतरा

टाइगर रिजर्व में इस तरह की गतिविधियां सीधे तौर पर बाघों और अन्य वन्यजीवों के आवास को प्रभावित करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जंगल का यह नुकसान इकोसिस्टम को असंतुलित कर सकता है और मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ा सकता है।

VIDEO से भी पुष्टि

घटनास्थल के वीडियो में साफ दिख रहा है कि बड़ी संख्या में पेड़ सूखे खड़े हैं या पूरी तरह गायब हो चुके हैं। जमीन समतल कर खेती जैसी गतिविधियां भी नजर आ रही हैं, जो अवैध कब्जे की पुष्टि करती हैं।

जांच और कार्रवाई की मांग

मामला सामने आने के बाद पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों ने इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और जंगल को दोबारा विकसित करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत बताई जा रही है।