रवींद्र-नज़रुल की रचनाधारा से सजेगा ‘सुरेर कैनवासे’, भिलाई के 16 कलाकार देंगे विशेष प्रस्तुति
भिलाई। बंगाल की समृद्ध साहित्यिक और सांगीतिक परंपरा के दो महान रचनाकारों—कविगुरु रवींद्रनाथ ठाकुर और विद्रोही कवि काज़ी नज़रुल इस्लाम—की सृजन चेतना को समर्पित विशेष सांस्कृतिक आयोजन ‘सुरेर कैनवासे’ का मंचन 23 अगस्त, रविवार को शाम 5 बजे रवींद्र भवन, दमदम, कोलकाता में होगा। वैष्णवघाटा साधना, कोलकाता के आयोजन में देश के विभिन्न शहरों से जुड़े करीब 160 कलाकार अपनी कला के माध्यम से दोनों महाकवियों की रचनात्मक विरासत को प्रस्तुत करेंगे।
यह आयोजन पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर गीत, नृत्य और आवृत्ति के माध्यम से रवींद्रनाथ और नज़रुल की रचनाओं में मौजूद अलग-अलग भावभूमियों को मंच पर आकार देगा। जहां रवींद्र संगीत में प्रेम, प्रकृति, मानवीय संवेदना और आत्मिक अनुभूति की कोमलता दिखाई देती है, वहीं नज़रुल की रचनाओं में स्वतंत्रता, प्रतिरोध, समानता और मानवीय गरिमा की मुखर अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। इन्हीं विविध भावों को एक साझा कलात्मक प्रस्तुति में पिरोना इस कार्यक्रम की विशेषता होगी।
कलाकारों के मार्गदर्शन में तैयार हुई प्रस्तुति
‘सुरेर कैनवासे’ को कोलकाता के वरिष्ठ कलाकार सतीनाथ मुखोपाध्याय और मिताली बैनर्जी के मार्गदर्शन एवं सहयोग से तैयार किया गया है। आयोजन से जुड़े कलाकारों के बीच विभिन्न शहरों की सांस्कृतिक प्रतिभाओं का समन्वय देखने को मिलेगा।
कार्यक्रम के मेंटर के रूप में जमशेदपुर की रुमकी दास, धनबाद की कुमकुम बैनर्जी, भिलाई के बिश्वजीत सरकार, रांची की लिली मुखर्जी, जमशेदपुर के संदीप दास और धनबाद की समिता भट्टाचार्य सहित अनेक कलाकार अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
भिलाई की टीम पेश करेगी रवींद्र-नज़रुल की रचनाएं
इस सांस्कृतिक आयोजन में भिलाई की संस्था ‘रवींद्र सुधा’ की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय होगी। संगीत गुरु विश्वजीत सरकार के नेतृत्व में भिलाई के 16 कलाकार कोलकाता के मंच पर अपनी सामूहिक प्रस्तुति देंगे।
इस दल में संचयिता राय, चैताली पाल, अनिता मुखर्जी, सुचिता मुखर्जी, सुमिता डे, महुआ भौमिक, आल्पना तालुकदार, बनानी विश्वास, संगीता चटर्जी, प्रतिमा दरीपा, सोमा राय, भाश्वती बोस, श्रावणी दास, सुतापा पात्र, रनबीर पाल और मणिमय मुखर्जी शामिल हैं।
भिलाई के कलाकारों की यह प्रस्तुति छत्तीसगढ़ से बंगाल की सांस्कृतिक भूमि तक पहुंचने वाली एक कलात्मक कड़ी के रूप में देखी जा रही है। रवींद्रनाथ के गीतों की भावपूर्ण अभिव्यक्ति और नज़रुल की ओजस्वी रचनाधर्मिता को एक साथ प्रस्तुत करने से कार्यक्रम में विविध रंग देखने को मिलेंगे।
कला साधकों और विशिष्ट व्यक्तित्वों का सम्मान
आयोजन के दौरान कला, साहित्य और सांस्कृतिक क्षेत्र में योगदान देने वाली कई विशिष्ट हस्तियों का सम्मान भी किया जाएगा। इनमें विधायक तरंगज्योति तिवारी, अनसूया मुखोपाध्याय, सतीनाथ मुखोपाध्याय, श्रीकांत आचार्य, प्रबुद्ध राहा, सुस्मिता गोस्वामी और सुरजीत चट्टोपाध्याय प्रमुख रूप से शामिल हैं।
आयोजकों का कहना है कि ‘सुरेर कैनवासे’ का मूल उद्देश्य केवल दो महान कवियों की स्मृति को मंच पर जीवित रखना नहीं, बल्कि उनकी रचनाओं में छिपे उन मूल्यों को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाना है, जो आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं—मानवता, प्रेम, स्वतंत्र विचार, सामाजिक समानता और सौंदर्यबोध।
रवींद्रनाथ और नज़रुल की रचनाएं दो अलग-अलग अभिव्यक्ति धाराओं का प्रतिनिधित्व करती हैं, लेकिन दोनों के केंद्र में मनुष्य और उसकी स्वतंत्र चेतना है। इसी साझा मानवीय दृष्टि को सुर, ताल, नृत्य और शब्दों के माध्यम से सामने लाने का प्रयास ‘सुरेर कैनवासे’ में किया गया है।
भिलाई सहित विभिन्न शहरों से जुड़े कलाकारों की सहभागिता इस आयोजन को एक व्यापक सांस्कृतिक स्वरूप देगी। कोलकाता के मंच पर जब रवींद्र संगीत की संवेदनशीलता और नज़रुल की ओजपूर्ण चेतना एक साथ आकार लेगी, तो यह संध्या कला और साहित्य के दो अमर स्वरूपों को समर्पित एक यादगार सांस्कृतिक अनुभव बनने की उम्मीद है।
