धमतरी में बैंकिंग योजनाओं की समीक्षा: कलेक्टर ने कहा- पात्र हितग्राहियों के ऋण प्रकरणों में देरी बर्दाश्त नहीं

धमतरी, 21 अगस्त 2026। जिले में शासकीय योजनाओं के माध्यम से किसानों, उद्यमियों, महिला समूहों और कमजोर वर्गों तक बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा की अध्यक्षता में हुई जिला स्तरीय परामर्शदात्री समिति (डीएलसीसी) की तिमाही बैठक में बैंकिंग सेवाओं और विभिन्न सरकारी ऋण योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

कलेक्टर ने बैंक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पात्र हितग्राहियों के ऋण प्रकरणों का परीक्षण पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से किया जाए। उन्होंने कहा कि बिना उचित कारण के किसी भी पात्र आवेदन को लंबित रखना या वापस करना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

कृषि के साथ पशुपालन, मत्स्य और उद्यानिकी पर फोकस

कलेक्टर ने बैंकर्स से कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए केवल कृषि ऋण तक सीमित न रहें। पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी से जुड़े प्रकरणों को भी प्राथमिकता दी जाए।

उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि पात्र ऋण प्रकरणों को बैंकों के समक्ष समय पर प्रस्तुत करें। वहीं बैंक अधिकारियों से कहा कि यदि किसी प्रकरण को अस्वीकृत किया जाता है तो उसके कारणों की स्पष्ट समीक्षा की जाए।

112 बैंक शाखाओं के जरिए जिले में वित्तीय सेवाएं

बैठक में अग्रणी जिला प्रबंधक श्री इंद्र कुमार टिलवानी ने बताया कि धमतरी जिले में कुल 112 बैंक शाखाएं कार्यरत हैं। इनमें धमतरी विकासखंड में 57, कुरूद में 31, मगरलोड में 8 और नगरी में 16 शाखाएं शामिल हैं।

बैठक के दौरान मार्च 2026 और जून 2026 की तुलनात्मक स्थिति के आधार पर जमा, ऋण-जमा अनुपात, कृषि ऋण, सूक्ष्म एवं लघु उद्योग तथा अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में ऋण वितरण की समीक्षा की गई।

कमजोर वर्गों तक ऋण पहुंचाने के निर्देश

कलेक्टर ने कहा कि बैंकिंग योजनाओं का उद्देश्य केवल ऋण वितरण के आंकड़े बढ़ाना नहीं, बल्कि जरूरतमंद और पात्र लोगों को समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।

उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय के लिए निर्धारित 10 प्रतिशत लक्ष्य के मुकाबले 2.66 प्रतिशत उपलब्धि और DRI श्रेणी में निर्धारित 1 प्रतिशत लक्ष्य के मुकाबले 0.02 प्रतिशत उपलब्धि पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने प्राथमिकता क्षेत्र के निर्धारित ऋण लक्ष्यों को पूरा करने के लिए बैंकों को सक्रियता बढ़ाने कहा।

दर्जनों ऋण प्रकरण लंबित, जल्द निराकरण के निर्देश

बैठक में विभिन्न योजनाओं के लंबित ऋण आवेदनों को लेकर कलेक्टर ने अधिकारियों और बैंकर्स को समय-सीमा में कार्रवाई के निर्देश दिए।

Enterprise Finance योजना के लंबित मामलों का एक सप्ताह के भीतर निराकरण करने कहा गया। वहीं जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र से भेजे गए PMFME के 66 लंबित प्रकरणों पर भी शीघ्र निर्णय लेने के निर्देश दिए गए।

किसान क्रेडिट कार्ड के तहत पशुपालन से जुड़े 113 और मत्स्य पालन के 88 लंबित प्रकरणों का भी प्राथमिकता से निराकरण करने कहा गया।

इसके अलावा प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, प्रधानमंत्री अजय योजना के 119 लंबित प्रकरणों तथा प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के स्वीकृति एवं वितरण के लिए लंबित 135 मामलों पर भी तेजी से कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

PNB नगरी शाखा के 73 मामले लंबित, नोटिस के निर्देश

शासकीय योजनाओं के तहत भेजे गए 73 ऋण प्रकरणों के लंबे समय से लंबित रहने और अनुचित कारणों से मामले वापस किए जाने को लेकर कलेक्टर ने पंजाब नेशनल बैंक की नगरी शाखा पर नाराजगी जताई।

उन्होंने शाखा प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी करने तथा 27 अगस्त 2026 तक सभी लंबित प्रकरणों का निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़े मामलों को अनावश्यक कारणों से वापस न करने की हिदायत दी। आवश्यकता पड़ने पर बैंक अधिकारी संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ संयुक्त निरीक्षण कर प्रकरणों का समाधान करेंगे।

सात नई बैंक शाखाओं के प्रस्ताव पर भी चर्चा

ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं का दायरा बढ़ाने के लिए जिले में सात नई बैंक शाखाओं के प्रस्तावों की समीक्षा की गई। अकलाडोंगरी, कचना, परखंदा, सिलोटी, सिंगपुर, गट्टासिल्ली और बोरई में शाखाएं प्रस्तावित हैं।

सिंगपुर में सितंबर में बैंक शाखा शुरू करने की तैयारी है, जबकि बोरई में भारतीय स्टेट बैंक की ओर से 20 अगस्त को सर्वे किया गया। अन्य प्रस्ताव अलग-अलग स्तरों पर प्रक्रियाधीन हैं।

कलेक्टर ने इंडियन बैंक और यूको बैंक की प्रस्तावित शाखाओं से संबंधित मामलों को राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में रखने के लिए आवश्यक पत्राचार करने को कहा।

ऋण-जमा अनुपात 67.98 प्रतिशत, आगे 80 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य

नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक श्री दिलीप दामानी ने बताया कि जिले का ऋण-जमा अनुपात 60 प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 67.98 प्रतिशत है।

उन्होंने बैंकों से इसे मार्च 2029 तक 70 से 80 प्रतिशत के स्तर तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयास करने का आग्रह किया।

बैठक में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के कृषि ऋण आउटरीच कार्यक्रम में करीब 71.49 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए जाने की जानकारी भी दी गई। कलेक्टर ने अन्य बैंकों को किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों, उद्यमियों और पात्र हितग्राहियों के लिए इसी तरह के ऋण शिविर आयोजित करने कहा।

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की भी हुई समीक्षा

बैठक में अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना समेत विभिन्न सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों की प्रगति पर भी चर्चा हुई।

कलेक्टर ने अटल पेंशन योजना के निर्धारित लक्ष्यों को शत-प्रतिशत पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से संबंधित शिकायतों का भी समय-सीमा में निराकरण करने को कहा गया।

वहीं NRLM के तहत स्व-सहायता समूहों के बैंक क्रेडिट लिंकेज को बढ़ाने, महिला उद्यमी ऋण योजना के लंबित मामलों को शीघ्र निपटाने और बैंक सखियों के मानदेय का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

PMJJBY और PMSBY के लंबित दावा प्रकरणों के त्वरित निराकरण तथा बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा SHG ऋण खातों में लगाए गए अतिरिक्त ब्याज की राशि नियमानुसार वापस करने के निर्देश भी दिए गए।

ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में बैंकिंग पहुंच बढ़ाने पर जोर

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि जिला प्रशासन और बैंकिंग संस्थानों के बीच प्रभावी समन्वय से ही सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकता है।

उन्होंने बैंक अधिकारियों से कहा कि ऋण प्रकरणों में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और समयबद्धता बनाए रखें। लंबित मामलों की नियमित समीक्षा हो और पात्र हितग्राहियों को अनावश्यक प्रक्रियात्मक अड़चनों का सामना न करना पड़े।

बैठक में जिला पंचायत के NRLM जिला परियोजना प्रबंधक श्री जय वर्मा, भारतीय रिजर्व बैंक रायपुर के प्रबंधक श्री अविनाश टोप्पो, नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक श्री दिलीप दामानी, अग्रणी जिला प्रबंधक श्री इंद्र कुमार टिलवानी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और जिले के बैंक नोडल अधिकारी उपस्थित रहे।