जीवामृत से जैविक खेती को बढ़ावा, गौरेला-पेण्ड्रा-मारवाही में 160 पंचायतों तक पहुंची जैविक खेती की पहल

गौरेला-पेण्ड्रा-मारवाही। किसानों को रासायनिक खेती के विकल्प के रूप में जैविक कृषि की ओर प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार और कृषि विभाग द्वारा लगातार जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी पहल के तहत गौरेला-पेण्ड्रा-मारवाही जिले में जीवामृत आधारित प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है।

जिले की 171 ग्राम पंचायतों में से 160 पंचायतों में जीवामृत के उपयोग से मॉडल किसान फार्म तैयार किए जा चुके हैं। इन मॉडल फार्मों को किसानों के लिए सीखने और नई कृषि पद्धतियों को समझने के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। आसपास के गांवों के किसानों को इन खेतों का भ्रमण कराकर जीवामृत के प्रयोग, फसल की स्थिति और जैविक खेती से होने वाले लाभों की जानकारी दी जा रही है।

प्रशिक्षण में किसानों ने सीखी जैविक खेती की तकनीक

गौरेला विकासखंड में कृषि विभाग की ओर से जीवामृत के उपयोग और जैविक खेती पर विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे किसानों ने भाग लिया।

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को जीवामृत तैयार करने और उसके उपयोग के तरीके के साथ मृदा परीक्षण, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, भूमि की गुणवत्ता बनाए रखने, जैविक खेती और उन्नत कृषि तकनीकों के बारे में जानकारी दी गई। अधिकारियों ने किसानों को खेती में स्थानीय एवं प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए भी प्रेरित किया।

किसान के खेत में दिखे जीवामृत के सकारात्मक परिणाम

प्रशिक्षण में शामिल किसानों को गौरेला के किसान बृजलाल राठौर के खेत का भ्रमण कराया गया। उनके खेत में म्यूटेंट विष्णुभोग धान की फसल में जीवामृत का प्रयोग किया गया है।

किसानों के अनुसार, लगभग 22 दिन की फसल में ही सुगंध महसूस होने लगी और पौधों की वृद्धि भी अच्छी दिखाई दी। खेत में फसल पर कीट एवं रोग का उल्लेखनीय प्रकोप भी देखने को नहीं मिला। खेत में दिखाई दे रहे परिणामों ने प्रशिक्षण में शामिल किसानों का ध्यान आकर्षित किया।

खेत देखकर किसानों में बढ़ा जैविक खेती का भरोसा

मॉडल फार्म के भ्रमण के दौरान किसानों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि खेत में जीवामृत के प्रयोग से फसल पर पड़ने वाले प्रभाव को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिला। इससे किसानों में जैविक और प्राकृतिक खेती को लेकर रुचि बढ़ी।

कृषि विभाग का प्रयास है कि जिले के अधिक से अधिक किसान जैविक खेती की तकनीकों को अपनाएं और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखते हुए कम लागत में बेहतर उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ें। मॉडल फार्मों के माध्यम से किसानों को स्थानीय स्तर पर सफल प्रयोगों को देखने और उन्हें अपने खेतों में अपनाने का अवसर मिल रहा है।

171 में से 160 पंचायतों तक पहुंची पहल यह दर्शाती है कि गौरेला-पेण्ड्रा-मारवाही जिले में जैविक खेती को लेकर कृषि विभाग की गतिविधियां व्यापक स्तर पर संचालित की जा रही हैं। जीवामृत आधारित खेती के प्रयोगों और किसान प्रशिक्षण के जरिए प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को खेतों तक पहुंचाने का प्रयास लगातार जारी है।