प्री-प्राइमरी को RTE से हटाने पर विवाद, 38 हजार गरीब बच्चों पर असर
रायपुर।
प्री-प्राइमरी शिक्षा को Right to Education (RTE) के दायरे से बाहर करने के सरकार के फैसले पर विवाद गहराता जा रहा है। सरकार ने इस निर्णय के पीछे “वित्तीय बोझ” (Financial Burden) को मुख्य कारण बताया है, लेकिन इसका सीधा असर हजारों गरीब परिवारों पर पड़ने वाला है।
जानकारी के अनुसार, इस फैसले से करीब 38,000 गरीब बच्चों की शुरुआती शिक्षा प्रभावित होगी। ये बच्चे अब निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।
सरकार का तर्क है कि प्री-प्राइमरी कक्षाओं पर हर साल लगभग 70 करोड़ रुपये का खर्च आता है, जो राज्य के लिए आर्थिक रूप से भारी साबित हो रहा है। इसी वजह से इसे RTE के दायरे से हटाने का निर्णय लिया गया।
हालांकि, इस फैसले को लेकर सामाजिक संगठनों और शिक्षा विशेषज्ञों ने कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि शुरुआती शिक्षा बच्चों के बुनियादी विकास के लिए बेहद जरूरी होती है, और इसे हटाना शिक्षा के अधिकार की भावना के खिलाफ है।
मामला अब हाईकोर्ट पहुंच चुका है, जहां इस फैसले को चुनौती दी गई है। कोर्ट में इस पर सुनवाई के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
फिलहाल, इस फैसले ने राज्य में शिक्षा व्यवस्था और गरीब बच्चों के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
