माता-पिता बच्चों को अपनी स्व-अर्जित संपत्ति से कर सकते हैं बेदखल: जानें क्या कहता है कानून और सुप्रीम कोर्ट का फैसला

नई दिल्ली: भारतीय कानून और सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के विभिन्न फैसलों में यह पूरी तरह से स्पष्ट किया गया है कि यदि संपत्ति माता-पिता की अपनी स्व-अर्जित (Self-Acquired Property) है, तो वे कानूनी रूप से अपने बच्चों (बेटे या बेटी) को उसमें से बेदखल करने का पूर्ण अधिकार रखते हैं। यदि बच्चा माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार करता है या उनका ख्याल नहीं रखता, तो माता-पिता उन्हें अपनी संपत्ति और घर दोनों से निकाल सकते हैं।

स्व-अर्जित संपत्ति और पैतृक संपत्ति में अंतर

कानून के अनुसार संपत्ति दो प्रकार की होती है, और दोनों पर बच्चों के अधिकार अलग-अलग होते हैं:

  • स्व-अर्जित संपत्ति (Self-Acquired Property): यह वह संपत्ति है जिसे माता-पिता ने अपनी कमाई, पेंशन या मेहनत से खरीदा है। इस संपत्ति पर बच्चों का कोई जन्मजात अधिकार नहीं होता। माता-पिता जिसे चाहें यह संपत्ति वसीयत (Will), गिफ्ट डीड या बिक्री के माध्यम से दे सकते हैं या किसी को भी बेदखल कर सकते हैं।

  • पैतृक संपत्ति (Ancestral Property): यह वह संपत्ति है जो चार पीढ़ियों से चली आ रही है। पैतृक संपत्ति में बच्चों को जन्म से ही कानूनी अधिकार प्राप्त होता है, और इसमें से बच्चों को पूरी तरह बेदखल करना आसान नहीं होता।

वरिष्ठ नागरिक अधिनियम (Maintenance and Welfare of Parents Act)

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 (Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act) के तहत वरिष्ठ नागरिकों को विशेष सुरक्षा प्रदान की गई है:

  1. यदि बच्चे माता-पिता का देखभाल नहीं करते या उन्हें प्रताड़ित करते हैं, तो माता-पिता संपत्ति हस्तांतरण (Property Transfer) को रद्द करवा सकते हैं।

  2. जिला मजिस्ट्रेट (DM) या ट्रिब्यूनल के पास यह अधिकार है कि वे प्रताड़ित करने वाले बच्चों या कानूनी वारिसों को घर से बेदखल करने का आदेश जारी कर सकें।

कानूनी विशेषज्ञ की राय: “स्व-अर्जित संपत्ति पर माता-पिता का निरपेक्ष अधिकार होता है। वे जीवनकाल में या वसीयत के जरिए जिसे चाहें संपत्ति का मालिक बना सकते हैं। बच्चे केवल माता-पिता की मृत्यु के बाद (यदि कोई वसीयत न लिखी गई हो) ही स्वाभाविक वारिस के रूप में दावा कर सकते हैं।”