क्रिसमस पर प्लास्टिक बोरी में छोड़ा गया नवजात, नाले से बचाई गई जिंदगी
जन्म का दिन क्रिसमस और साईं जन्मोत्सव जैसा पावन था, लेकिन हालात बेहद दर्दनाक। एक नवजात, जिसे अपनी मां का ममत्व और प्यार महसूस करने का मौका नहीं मिला, खुद को प्लास्टिक बोरी में बंद और नाले में फेंका हुआ पाया। मिट्टी में सना यह मासूम केवल रो सकता था, और यही उसकी जिंदगी बचाने का कारण बना।
बच्चे के रोने की आवाज राहगीरों तक पहुंची। उन्होंने तुरंत मदद के लिए कदम बढ़ाए और नवजात को अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में इलाज शुरू हुआ, और आज यह बच्चा उन अजनबियों के प्यार और देखभाल में महफूज है, जिनसे उसका कोई खून का रिश्ता नहीं।
नाले में फेंका मिला नवजात
यह घटना छत्तीसगढ़ के भखारा क्षेत्र की है, जहां चरोटा-गातापार मोड़ के पास सड़क किनारे एक नाले में प्लास्टिक बोरी में नार-फूल के साथ यह नवजात पड़ा मिला। बुधवार सुबह करीब 6 बजे ग्रामीणों ने बच्चे को देखा। मितानिन राधा ध्रुव ने तत्काल बच्चे को बोरी से बाहर निकाला और पास की महिला से स्कार्फ मांगकर उसे लपेटा।
अस्पताल में चल रहा इलाज
मितानिन ने बच्चे को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोर्रा पहुंचाया, जहां उसकी प्राथमिक देखभाल की गई। फिर एंबुलेंस से बच्चे को जिला अस्पताल लाया गया। एसएनसीयू प्रभारी डॉ. अखिलेश देवांगन और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रविकिरण शिंदे ने बताया कि बच्चे का तापमान बहुत कम हो गया था। उसे तुरंत वॉर्मर में रखा गया और सी-पैप मशीन से ऑक्सीजन दी गई। बच्चे की हालत में अब सुधार हो रहा है।
अज्ञात महिला के खिलाफ FIR
पुलिस ने नवजात को नाले में फेंकने वाले अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। भखारा पुलिस टीआई लेखराम ठाकुर ने बताया कि आसपास के क्षेत्र में पूछताछ और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग कर रहा गर्भवतियों का रिकॉर्ड खंगाल
स्वास्थ्य विभाग इस घटना के बाद इलाके की गर्भवतियों का रिकॉर्ड खंगाल रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रामपुर, पचपेड़ी, सिलौटी, तर्रागोंदी और अन्य केंद्रों से जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि इस अमानवीय घटना के पीछे की सच्चाई उजागर हो सके।
यह घटना न केवल समाज को झकझोरने वाली है, बल्कि हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि मासूम बच्चों के प्रति हमारी जिम्मेदारी क्या होनी चाहिए। इस बच्चे की जिंदगी को बचाने वाले सभी लोग मानवता का आदर्श उदाहरण हैं।
