सुकमा में प्रशासन की बड़ी पहल: 16 वर्षीय किशोरी का बाल विवाह रुकवाया, सुरक्षित आश्रय में भेजा

सुकमा, 21 अगस्त 2026। बाल विवाह के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सुकमा जिले में प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप कर एक नाबालिग बालिका का विवाह रुकवा दिया। तोंगपाल क्षेत्र के मासापारा-कावराकोपा इलाके में मिली सूचना पर महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन और पुलिस की संयुक्त टीम ने तत्काल कार्रवाई की।

प्रशासन की तत्परता से 16 वर्षीय किशोरी को बाल विवाह से बचाया गया और उसकी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उसे संरक्षण में लिया गया। अधिकारियों ने संबंधित परिवारों को बाल विवाह के कानूनी प्रावधानों और इसके सामाजिक एवं व्यक्तिगत दुष्प्रभावों की जानकारी भी दी।

सूचना मिलते ही सक्रिय हुआ प्रशासन

बाल विवाह की जानकारी सामने आने के बाद संयुक्त टीम बिना देरी किए मौके पर पहुंची। टीम ने दोनों पक्षों से बातचीत कर उन्हें समझाया कि निर्धारित कानूनी उम्र से पहले विवाह कराना कानूनन अपराध है।

अधिकारियों ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए नाबालिग का विवाह नहीं कराने की समझाइश दी। समझाइश के बाद युवक पक्ष ने विवाह स्थगित करने पर सहमति व्यक्त की।

किशोरी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया

प्रशासन के अनुसार, महारापारा हमीरगढ़ निवासी 16 वर्षीय बालिका को विवाह के उद्देश्य से युवक अपने साथ लेकर आया था। संयुक्त टीम ने मामले में बालिका की सुरक्षा और उसके सर्वोत्तम हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

बालिका को पहले उसके गृहग्राम पहुंचाने का प्रयास किया गया, लेकिन वहां परिजन उपलब्ध नहीं थे। इसके बाद उसे सुरक्षित रूप से सुकमा लाया गया और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने तक सखी सेंटर में सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया गया।

मामले में आवश्यक दस्तावेजी कार्रवाई करते हुए घोषणा-पत्र लिया गया और पंचनामा तैयार किया गया। संबंधित पक्षों को बाल विवाह कराने की स्थिति में होने वाली कानूनी कार्रवाई के बारे में भी स्पष्ट रूप से बताया गया।

बाल कल्याण समिति के समक्ष होगी आगे की प्रक्रिया

बालिका के संरक्षण और आगे की कार्रवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की प्रक्रिया की जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य बालिका की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ उसके भविष्य और सर्वोत्तम हित की रक्षा करना है।

कई विभागों की संयुक्त टीम ने संभाला मोर्चा

कार्रवाई जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी तथा जिला बाल संरक्षण अधिकारी के मार्गदर्शन में की गई। इसमें संरक्षण अधिकारी, सेक्टर सुपरवाइजर, चाइल्ड लाइन परियोजना समन्वयक, पुलिस विभाग के प्रतिनिधियों के साथ आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, ग्राम सचिव और रोजगार सहायक सहित संबंधित मैदानी कर्मचारी शामिल रहे।

बाल विवाह रोकने के लिए जागरूकता और कार्रवाई दोनों पर जोर

प्रशासन का कहना है कि बाल विवाह बच्चों के अधिकारों और उनके सुरक्षित भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। इसे रोकने के लिए एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सूचना मिलने पर तत्काल हस्तक्षेप कर कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है।

सुकमा में हुई यह कार्रवाई बताती है कि बाल विवाह की सूचना पर समय पर प्रशासनिक हस्तक्षेप से नाबालिगों को असमय विवाह से बचाया जा सकता है और उन्हें सुरक्षित एवं बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया जा सकता है।