महासमुंद वन विभाग की ‘फायर फाइटिंग’ रणनीति रंग लाई: आगजनी की घटनाओं में 80% की गिरावट

महासमुंद: भीषण गर्मी के मौसम में छत्तीसगढ़ के जंगलों को आग से बचाने के लिए महासमुंद वन विभाग ने इस साल एक मिसाल पेश की है। विभाग की नई रणनीति, आधुनिक तकनीक और मैदानी अमले की मुस्तैदी के चलते साल 2026 में आगजनी की घटनाओं में 80 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है।

मैदान में खुद डीएफओ: फॉग मशीन लेकर बुझा रहे आग

इस पूरे अभियान का नेतृत्व डीएफओ (DFO) मयंक पांडेय खुद कर रहे हैं। वे केवल दफ्तर से निर्देश नहीं दे रहे, बल्कि खुद अपनी गाड़ी में फॉग (FOG) मशीन रखकर फील्ड में तैनात हैं। आग की सूचना मिलते ही वे अपने ड्राइवर के साथ मौके पर पहुँचकर आग बुझाने के काम में जुट जाते हैं। उनकी इस सक्रियता ने पूरे विभाग में नई ऊर्जा भर दी है।

आंकड़ों में बड़ी राहत

वन विभाग की तत्परता का असर सरकारी आंकड़ों में साफ नजर आ रहा है:

  • 2025 का आंकड़ा: 15 फरवरी से 7 अप्रैल के बीच कुल 284 घटनाएं हुई थीं।

  • 2026 का आंकड़ा: इस साल विभाग ने इन घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण पाकर इन्हें न्यूनतम स्तर पर ला दिया है।

‘नो फायर अभियान’ और जमीनी तैयारी

जंगलों को बचाने के लिए 15 फरवरी से 15 अप्रैल तक विशेष “नो फायर अभियान” चलाया जा रहा है। इसके लिए विभाग ने एक बड़ी टीम तैनात की है:

  • कार्यबल: 150 चौकीदार, 70 बीट गार्ड और 25 डिप्टी रेंजर/रेंजर (महिला अधिकारी भी शामिल)।

  • संसाधन: आग बुझाने के लिए 120 फायर ब्लोअर (101 सरकारी और 19 कर्मचारियों द्वारा आपसी सहयोग से खरीदे गए) का उपयोग किया जा रहा है।

  • सुविधाएं: रात में काम करने के लिए कर्मचारियों को टॉर्च, जूते और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरण दिए गए हैं।

सैटेलाइट निगरानी और हेल्पलाइन

आग पर त्वरित काबू पाने के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट से जैसे ही आग का अलर्ट मिलता है, कंट्रोल रूम तुरंत संबंधित रेंजर को सूचना भेजता है। विभाग ने जनता के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं:

हेल्पलाइन नंबर: 8815622084, 9243890036

ओडिशा से समन्वय और सरायपाली पर नजर

सरायपाली का क्षेत्र पहाड़ी और घना होने के कारण यहाँ आग का खतरा अधिक रहता है। इसके समाधान के लिए डीएफओ ने ओडिशा के नुआपड़ा और बरगढ़ वन अधिकारियों के साथ संयुक्त रणनीति बनाई है, ताकि सीमावर्ती इलाकों में आग को फैलने से रोका जा सके।

वन्यजीवों की सुरक्षा प्राथमिकता

महुआ बीनने के लिए लगाई गई आग अक्सर अनियंत्रित होकर वन्यजीवों (तेंदुआ, भालू, हिरण) का घर उजाड़ देती है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे खेतों में पराली जलाने या महुआ चुनने के दौरान आग लगाने में सावधानी बरतें, क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह कर सकती है

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