महाराष्ट्र की राजनीति में फिर बड़ा भूकंप: उद्धव गुट में ‘ऑपरेशन टाइगर’, 6 सांसदों की बगावत का दावा, संजय राउत ने लगाए गंभीर आरोप

इस समाचार लेख के अनुसार, महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) में एक बड़ी टूट की खबर सामने आ रही है, जिसे ‘ऑपरेशन टाइगर’ का नाम दिया जा रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी नीचे मुख्य बिंदुओं में दी गई है:

1. सांसदों की बड़ी बगावत और दावा

  • 9 में से 6 सांसदों की बगावत: शिवसेना (UBT) के कुल 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने बगावत कर दी है। सूत्रों के अनुसार, इन बागी सांसदों ने बुधवार सुबह 9:30 बजे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र भेजकर एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना में विलय करने की मांग की है।

  • करोड़ों के ऑफर का आरोप: राज्यसभा सांसद संजय राउत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि इन बागी सांसदों को 50-50 करोड़ रुपये का ऑफर दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि सांसदों को 15-15 करोड़ रुपये पहुंचाए जा चुके हैं और उन्हें 3 चार्टर्ड विमानों से दिल्ली लाया गया है।

  • बागी लिस्ट में नाम: सूत्रों के मुताबिक, पत्र भेजने वालों में नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय दीना पाटिल का नाम शामिल है। हालांकि, संजय दीना पाटिल ने इस बात का खंडन करते हुए कहा है कि वे उद्धव ठाकरे के साथ ही रहेंगे।


2. संजय राउत का गुस्सा और प्रतिक्रिया

  • प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपशब्द: दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संजय राउत बेहद गुस्से में नजर आए और उन्होंने बागी सांसदों के लिए अपशब्दों (गाली) का इस्तेमाल किया। उन्होंने उन्हें “बेईमान” कहा।

  • भाषा पर सफाई: जब उनके अपशब्दों पर विवाद बढ़ा, तो राउत ने सफाई देते हुए कहा कि मराठी में ऐसे शब्द आम बोलचाल का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग 15 करोड़ लेकर पार्टी छोड़ रहे हैं, उन पर फूल नहीं बरसाए जा सकते।

  • शपथ तोड़ने का आरोप: राउत ने यह भी बताया कि 14 जून को हुई बैठक में इन सभी सांसदों ने अपनी मां, बच्चों और देवी-देवताओं की कसम खाकर उद्धव ठाकरे का साथ न छोड़ने का वादा किया था, जिसे उन्होंने तोड़ दिया।


3. उद्धव ठाकरे का डैमेज控制 (Damage Control) और व्हिप

  • 18 जून को बुलाई आपात बैठक: उद्धव ठाकरे और पार्टी के वरिष्ठ नेता बागी सांसदों को मनाने और उनसे संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी ने गुरुवार (18 जून) सुबह 11 बजे दिल्ली में संसदीय दल की एक अनिवार्य बैठक बुलाई है।

  • कड़ी कार्रवाई की चेतावनी: पार्टी के संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत ने सभी सांसदों को व्हिप जारी कर इस बैठक में मौजूद रहने का निर्देश दिया है। संजय राउत ने चेतावनी दी है कि जो सांसद इस बैठक में नहीं आएंगे, उनके खिलाफ अयोग्यता (Disqualification) की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • स्पीकर से मुलाकात: अरविंद सावंत और अनिल देसाई ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर पत्र सौंपा है कि पार्टी से अलग होने वाले किसी भी संभावित गुट को आधिकारिक मान्यता न दी जाए।


4. इतिहास खुद को दोहरा रहा है?

यह घटनाक्रम जून 2022 की याद दिलाता है, जब ठीक 4 साल पहले एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायक शिवसेना से अलग हो गए थे।

  • उस बगावत के कारण उद्धव ठाकरे की महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार गिर गई थी।

  • बाद में चुनाव आयोग और विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर ने एकनाथ शिंदे के गुट को ही “असली शिवसेना” माना था और पार्टी का नाम व ‘धनुष-बाण’ का प्रतीक उन्हें सौंप दिया था।

  • वर्तमान में उद्धव गुट के नेताओं का कहना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट उनकी याचिका (SLP) पर समय रहते फैसला दे देता, तो आज दोबारा यह स्थिति पैदा नहीं होती।


5. अन्य राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

  • बीजेपी की प्रतिक्रिया: बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने संजय राउत की भाषा की निंदा करते हुए कहा कि हताशा में कोई सामान्य व्यक्ति भी ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करता।

  • कांग्रेस का अमित शाह पर आरोप: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में विपक्ष को कमजोर करने और अपनी पुरानी राजनीतिक हार का बदला लेने के लिए विपक्षी सांसदों को प्रलोभन देकर भाजपा/एनडीए में शामिल करा रहे हैं।