स्टिंग ऑपरेशन का खुलासा: सनातन धर्म के ‘महामंडलेश्वर’ और ‘जगतगुरु’ पदों का सौदा

सनातन धर्म की प्राचीन परंपराओं और सर्वोच्च धार्मिक पदों को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। एक स्टिंग ऑपरेशन में यह उजागर हुआ है कि अखाड़ों में ‘महामंडलेश्वर’ और ‘जगतगुरु’ जैसी सर्वोच्च और प्रतिष्ठित उपाधियों को देने के नाम पर जमीन, नकदी और भारी दक्षिणा की मांग की जा रही है।

रिपोर्टर ने अमेरिका से लौटे एक पूर्व आईटी पेशेवर (कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट) का फर्जी रूप धरकर देश के तीन प्रमुख अखाड़ों—जूना अखाड़ा, निर्वाणी अनी अखाड़ा, और निर्मोही अखाड़ा—के शीर्ष महंतों से संपर्क किया। इस पड़ताल में जो बातें सामने आईं, वे धार्मिक व्यवस्था और परंपराओं पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

स्टिंग ऑपरेशन के मुख्य बिंदु

1. जूना अखाड़ा: “1 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री कराओ” (महंत हरि गिरी)

  • शर्त व मांग: बातचीत के दौरान जूना अखाड़े के महंत हरि गिरी ने कहा कि महामंडलेश्वर का पद दिया जा सकता है, लेकिन इसके बदले अखाड़े के नाम पर कम से कम 1 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री करवानी होगी।

  • स्वामित्व व प्रबंधन: जमीन का कानूनी मालिकाना हक अखाड़े का रहेगा, जबकि उसकी देखरेख और प्रबंधन का अधिकार पद लेने वाले व्यक्ति के पास होगा।

  • शाही लवाजमे का रेट तय: महंत ने स्पष्ट किया कि व्यक्ति जितनी बड़ी दक्षिणा देगा, उसी अनुपात में उसे रथ, सिंहासन, शाही छतरी और छड़ी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

2. निर्वाणी अनी अखाड़ा: “बना देंगे जगतगुरु, कौन सी बड़ी बात है” (श्रीमहंत मुरलीदास)

  • ऑफर व वादा: जब रिपोर्टर ने संपर्क कर पद की इच्छा जताई, तो श्रीमहंत मुरलीदास ने बेहद हलके अंदाज में कहा, “बना देंगे, कौन सी बड़ी बात है।”

  • जगतगुरु का पद: जब उन्हें बताया गया कि व्यक्ति अमेरिका में ऊंचे पद पर रह चुका है और उसके पास अकूत संपत्ति है, तो उन्होंने महामंडलेश्वर से भी बड़ा “जगतगुरु” पद देने का प्रस्ताव रख दिया।

  • 200-400 महामंडलेश्वर अधीन करने का दावा: उन्होंने यहां तक कहा कि जगतगुरु बनने के बाद उनके अधीन 200 से 400 महामंडलेश्वर काम करेंगे।

3. निर्मोही अखाड़ा: 20 लाख रुपये नकद की सीधी मांग (महंत राजेंद्र दास)

  • शर्त व नकद लेनदेन: नासिक में हुई बैठक के दौरान महंत राजेंद्र दास ने बिना किसी हिचकिचाहट के सीधे 20 लाख रुपये नकद (व्यवहार) की मांग रखी।

  • पैसों का बंटवारा: उन्होंने बताया कि दीक्षा और अभिषेक समारोह के समय यह 20 लाख रुपये अखाड़े और वहां उपस्थित लोगों में बांटे जाएंगे।

  • अखाड़े की सदस्यता: व्यक्ति को निर्मोही अखाड़े का सदस्य बनाकर महामंडलेश्वर की उपाधि दी जाएगी, जबकि संबंधित आश्रम और जमीन अखाड़ा परिषद के नाम रहेगी।

अखाड़ा परिषद की प्रतिक्रिया: “पैसे लेकर पद देना परंपराओं के खिलाफ”

इस खुलासे के बाद अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने सख्त प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए स्थिति स्पष्ट की:

  • वित्तीय लेन-देन अवैध: उन्होंने कहा कि महामंडलेश्वर या अन्य धार्मिक पद देने के बदले किसी भी प्रकार की राशि, जमीन या नकदी लेना पूरी तरह से गलत और अनुचित है।

  • पात्रता के मानक: महामंडलेश्वर पद केवल उसे ही दिया जा सकता है जो शास्त्र मर्मज्ञ हो, विद्वान हो, वैरागी हो, संन्यास के कठोर नियमों का पालन करता हो और निष्काम भाव से सेवा में लीन हो।

  • परंपराओं का उल्लंघन: उन्होंने स्पष्ट किया कि पैसों या संपत्ति के बल पर पद आवंटित करना सनातन धर्म की प्राचीन परंपराओं और मर्यादाओं के सर्वथा विपरीत है।