रायपुर में लोकतंत्र-सेनानियों का महासम्मान: “संस्कृति और मूल्यों से ही मजबूत होगी भारत की पहचान” — इंद्रेश कुमार
रायपुर, 02 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम (DDU Auditorium) में ‘लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह’ का भव्य आयोजन किया गया। इस गरिमामयी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आपातकाल के दौरान देश की रक्षा और लोकतंत्र की बहाली के लिए संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को शाल और श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया।
इस दौरान उन्होंने आपातकाल के योद्धाओं के अभूतपूर्व त्याग और बलिदान को याद करते हुए इसे आज की नई पीढ़ी के लिए एक बड़ा प्रेरणा स्रोत बताया।
“आपातकाल के योद्धा” विशेष स्मारिका का विमोचन
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और मंच पर उपस्थित वरिष्ठ अतिथियों ने आपातकाल के संघर्षों और उस दौर की गाथाओं पर आधारित एक विशेष स्मारिका ‘आपातकाल के योद्धा’ का विमोचन किया।
इसके साथ ही, आपातकाल स्मृति दिवस के मौके पर आयोजित राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को भी मंच पर स्मृति चिन्ह और प्रोत्साहन राशि देकर पुरस्कृत किया गया। आपको बता दें कि इस प्रतियोगिता में पूरे प्रदेश से 540 से अधिक छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया था।
मुख्य वक्ता इंद्रेश कुमार का संबोधन: “लोकतंत्र सिर्फ व्यवस्था नहीं, जीवन मूल्य है”
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय विचारक इंद्रेश कुमार ने अपने संबोधन में लोकतंत्र की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने विचार साझा करते हुए कहा:
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अधिकारों का हनन: 1975 के आपातकाल के दौरान देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचल दिया गया था और नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर गहरा आघात हुआ था।
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सेनानियों का त्याग: हमारे लोकतंत्र सेनानियों ने जेल की काल कोठरी में असहनीय यातनाएं सहकर भी देश के लोकतांत्रिक आदर्शों को जिंदा रखा।
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युवाओं से आह्वान: उन्होंने आज की युवा पीढ़ी से राष्ट्र प्रथम (Nation First) की भावना को अपनाने, सामाजिक समरसता बढ़ाने और समाज को नशामुक्त व स्वच्छ बनाने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने साझा की दर्दभरी पारिवारिक यादें
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में बेहद भावुक होते हुए उस दौर की अपनी पुरानी पारिवारिक स्मृतियों को मंच से साझा किया। उन्होंने बताया:
“आपातकाल के समय मेरे बड़े पिताजी स्वर्गीय नरहरि साय को 19 महीने तक जेल में रहना पड़ा था। उस दौर में लोकतंत्र सेनानियों के परिवारों को गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट झेलना पड़ा था। तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवक भेष बदलकर हमारे घरों तक गुपचुप तरीके से राशन पहुंचाते थे, ताकि किसी भी सेनानी का परिवार भूखा न सोए।”
मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत के इस ऐतिहासिक संघर्ष और काले अध्याय के इतिहास को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी को इस लोकतंत्र और आजादी की असली कीमत का अहसास हो सके।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी दी सीख
छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे कठिन और अंधकारमय दौर था। प्रेस पर लगी सेंसरशिप और जबरन किए गए संविधान संशोधनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह कालखंड हमें हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सजग, सतर्क और समर्पित रहने की सीख देता है।
गरिमामयी उपस्थिति
इस राज्य स्तरीय भव्य समारोह में केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष कैलाश सोनी, विधायक मोतीलाल साहू और गोमती साय समेत बड़ी संख्या में प्रदेशभर से आए लोकतंत्र सेनानी, उनके परिजन, प्रबुद्ध नागरिक और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
