कांकेर में भालू का खूनी हमला, भाई-बहन समेत तीन की मौत; शवों के पास घंटों डटा रहा मादा भालू
कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक दर्दनाक घटना सामने आई है। नरहरपुर वन परिक्षेत्र के एक गांव में खेत में काम कर रहे ग्रामीणों पर मादा भालू ने अचानक हमला कर दिया। इस हमले में भाई-बहन सहित तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत फैल गई और वन विभाग को तत्काल रेस्क्यू अभियान चलाना पड़ा।
खेत में काम के दौरान हुआ हमला
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ग्रामीण खेतों में कृषि कार्य कर रहे थे, तभी मादा भालू ने उन पर हमला कर दिया। हमला इतना अचानक और तेज था कि लोगों को बचने का मौका नहीं मिला। दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल एक अन्य व्यक्ति को अस्पताल भेजा गया। बाद में एक अन्य महिला की भी मौत की पुष्टि हुई।
शवों के पास ही डटा रहा भालू
घटना के बाद मादा भालू काफी देर तक मृतकों के शवों के आसपास घूमती रही। स्थानीय लोगों के अनुसार, वह किसी को घटनास्थल के पास नहीं आने दे रही थी। इस दौरान दूर से बनाए गए वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आए, जिससे इलाके में भय का माहौल और बढ़ गया।
शावक की मौत के बाद आक्रामक होने की आशंका
ग्रामीणों का दावा है कि एक दिन पहले मादा भालू के शावक की मौत हो गई थी। उनका मानना है कि इसी कारण वह असामान्य रूप से आक्रामक हो गई और लोगों पर हमला कर बैठी। हालांकि वन विभाग का कहना है कि शावक की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई थी और घटना के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है।
वन विभाग पर लापरवाही के आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि भालू की मौजूदगी की सूचना पहले ही वन विभाग को दे दी गई थी, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि चेतावनी और सुरक्षा व्यवस्था समय पर की जाती, तो इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था। घटना के बाद लोगों ने विभाग के खिलाफ नाराजगी भी जताई।
रेस्क्यू अभियान चलाकर भालू को पकड़ा गया
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रायपुर से विशेषज्ञ वन्यजीव बचाव दल बुलाया गया। टीम ने कई घंटों के अभियान के बाद मादा भालू को बेहोश कर सुरक्षित पिंजरे में बंद किया। अभियान के दौरान भालू ने वन विभाग की गाड़ी पर भी हमला करने की कोशिश की, जिससे अधिकारियों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ी।
मानव-वन्यजीव संघर्ष बना बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों के सिकुड़ने, मानवीय गतिविधियों के बढ़ने और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास प्रभावित होने से इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं। विशेषकर वन क्षेत्र से लगे गांवों में भालू, हाथी और तेंदुए जैसे वन्यजीवों के साथ टकराव की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे क्षेत्रों में निगरानी, समय पर चेतावनी और जागरूकता अभियान बढ़ाने की आवश्यकता है।
जांच और मुआवजे की प्रक्रिया शुरू
वन विभाग ने घटना की जांच शुरू कर दी है। मृतकों के परिजनों को नियमानुसार सहायता राशि देने और घायल व्यक्ति के उपचार की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन ने ग्रामीणों से फिलहाल जंगल और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में जाने से बचने तथा वन विभाग के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
