भारत में डेटा सेंटर की बिजली मांग 800% बढ़ने का अनुमान, 2031-32 तक 13.56 गीगावॉट बिजली की जरूरत
भारत में डिजिटल सेवाओं के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के कारण डेटा सेंटरों की बिजली मांग में आने वाले वर्षों में भारी वृद्धि होने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2031-32 तक देश में डेटा सेंटर सेक्टर को लगभग 13.56 गीगावॉट बिजली की आवश्यकता होगी।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्तमान स्तर की तुलना में यह मांग करीब 800 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5G नेटवर्क और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के चलते डेटा सेंटरों की संख्या और क्षमता दोनों तेजी से बढ़ रही हैं।
भारत में मुंबई, हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरु और नोएडा जैसे शहर डेटा सेंटर हब के रूप में तेजी से विकसित हो रहे हैं। बड़ी टेक कंपनियां और क्लाउड सेवा प्रदाता इन शहरों में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहे हैं।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि डेटा सेंटरों की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के लिए बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग भी बढ़ाना होगा।
डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर देश की आईटी और तकनीकी विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।
