मिड-डे मील पर हाईकोर्ट की सख्त आपत्ति: 26 जिलों में बच्चों को पोषण आहार न मिलने पर राज्य शासन से मांगा जवाब
बिलासपुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ में स्कूली बच्चों को मिलने वाले मिड-डे मील (Mid-Day Meal) योजना के तहत मिलेट-चिक्की (पोषण आहार) के वितरण में हो रही देरी पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश के 26 जिलों में बच्चों तक पोषण आहार न पहुंचने और पर्याप्त फंड उपलब्ध होने के बावजूद वितरण रोककर रखने पर हाईकोर्ट ने राज्य शासन से जवाब मांगा है।
फंड होने के बावजूद वितरण में देरी पर उठाए सवाल
मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि जब योजना के लिए आवश्यक बजट और फंड शासन के पास उपलब्ध है, तो फिर 26 जिलों के स्कूली बच्चों को मिलेट-चिक्की का लाभ देने में देरी क्यों की जा रही है? अदालत ने बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी इस योजना में लापरवाही को बेहद गंभीर माना है।
राज्य शासन से मांगा स्पष्टीकरण
अदालत ने राज्य शासन को निर्देश दिए हैं कि वे इस मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करें और बताएं कि वितरण में आ रही अड़चनों का क्या कारण है। साथ ही, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि इस व्यवस्था को कब तक दुरुस्त कर सभी पात्र 26 जिलों के स्कूलों में नियमित वितरण शुरू कर दिया जाएगा।
हाईकोर्ट की इस सख्त टिप्पणी के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस हस्तक्षेप के बाद स्कूली बच्चों को जल्द ही पोषण आहार का लाभ मिलना शुरू होगा।
