ग्रीनलैंड पर बयान से यूरोप में हलचल, डेनमार्क ने दबाव को किया खारिज

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की ओर से आए हालिया बयान के बाद यूरोप में राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। इस मुद्दे पर कई यूरोपीय नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, जबकि डेनमार्क ने किसी भी प्रकार के दबाव या बाहरी हस्तक्षेप को सिरे से खारिज कर दिया है।

डेनमार्क सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्रीनलैंड की स्थिति और उससे जुड़े निर्णय उसकी संप्रभुता और ग्रीनलैंड की स्वायत्त व्यवस्था के तहत ही तय होंगे। कोपेनहेगन की ओर से कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय मामलों में संवाद और सहयोग आवश्यक है, लेकिन किसी भी तरह का राजनीतिक दबाव स्वीकार्य नहीं होगा।

यूरोपीय राजनीतिक हलकों में इस बयान को लेकर व्यापक चर्चा देखी जा रही है। कई नेताओं का मानना है कि आर्कटिक क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ने के बीच ऐसे बयान क्षेत्रीय स्थिरता और राजनयिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। इस संदर्भ में यूरोपीय संघ के भीतर भी समन्वित रुख अपनाने की बात कही जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक संसाधनों के कारण यह क्षेत्र वैश्विक रणनीति के लिहाज से अहम बनता जा रहा है। ऐसे में यूरोप इस मुद्दे पर एकजुटता और स्पष्टता के साथ आगे बढ़ना चाहता है।

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी बयान के बाद यूरोप में सामने आई प्रतिक्रियाएँ यह संकेत देती हैं कि क्षेत्रीय संप्रभुता और कूटनीतिक संतुलन को लेकर यूरोपीय देश सतर्क रुख अपनाए हुए हैं, जिसमें डेनमार्क की स्पष्ट स्थिति प्रमुख रूप से उभरकर आई है।