गाज़ा ‘Board of Peace’ में भारत को आमंत्रण, पश्चिम एशिया में भूमिका पर बढ़ी चर्चा

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने गाज़ा क्षेत्र के लिए प्रस्तावित ‘Board of Peace’ में भारत को शामिल किए जाने का सुझाव दिया है। इस पहल को लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज़ हो गई है, खासकर पश्चिम एशिया में भारत की उभरती भूमिका को लेकर।

बताया जा रहा है कि यह प्रस्ताव गाज़ा में शांति, पुनर्निर्माण और मानवीय सहायता के समन्वय से जुड़ा हुआ है। ऐसे किसी बोर्ड में भारत की भागीदारी को क्षेत्रीय स्थिरता के प्रयासों में एक संतुलित और जिम्मेदार भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। भारत लंबे समय से संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय सहायता, विकास सहयोग और कूटनीतिक संवाद का समर्थक रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भारत इस तरह की किसी अंतरराष्ट्रीय पहल से जुड़ता है, तो इससे पश्चिम एशिया में उसकी रणनीतिक उपस्थिति और प्रभाव बढ़ सकता है। साथ ही, यह भारत की उस विदेश नीति के अनुरूप होगा जिसमें संवाद, शांति और बहुपक्षीय सहयोग पर जोर दिया जाता है।

गाज़ा की स्थिति लंबे समय से वैश्विक चिंता का विषय रही है। ऐसे में किसी भी नए शांति मंच या बोर्ड का उद्देश्य स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाना माना जा रहा है। भारत की संभावित भागीदारी को क्षेत्रीय देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच भरोसे को मजबूत करने वाला कदम माना जा सकता है।

हालाँकि, इस प्रस्ताव को लेकर आधिकारिक स्तर पर अभी कोई विस्तृत घोषणा नहीं हुई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकता है कि ‘Board of Peace’ की संरचना क्या होगी और इसमें किन देशों या संस्थाओं की भूमिका तय की जाएगी।

गाज़ा के लिए प्रस्तावित ‘Board of Peace’ में भारत को आमंत्रण की चर्चा, न केवल भारत-अमेरिका संबंधों बल्कि पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीतिक भूमिका को भी नए संदर्भ में सामने लाती है।