ई-बस से आवास और वेस्ट-टू-एनर्जी तक, नगरीय योजनाओं को समयबद्ध पूरा करने पर जोर

रायपुर, 24 अगस्त 2026। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने मंत्रालय में विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन में जनसुविधा, वित्तीय व्यवहार्यता और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। बैठक में प्रधानमंत्री ई-बस योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत प्रस्तावित वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं तथा 15वें वित्त आयोग से संबंधित कार्यों की समीक्षा की गई।

बैठक में सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमित अग्रवाल सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

रायपुर में ई-बसों के लिए तैयार होगा व्यापक रूट नेटवर्क

बैठक में प्रधानमंत्री ई-बस योजना को लेकर विशेष चर्चा हुई। सोनमणि बोरा ने अधिकारियों को रायपुर शहर के लिए ऐसा रूट नेटवर्क तैयार करने के निर्देश दिए, जिससे सार्वजनिक परिवहन अधिक लोगों की पहुंच में आ सके।

उन्होंने कहा कि ई-बसों के मार्ग निर्धारित करते समय स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, प्रमुख बाजार, महत्वपूर्ण सार्वजनिक संस्थान और शहर के दर्शनीय स्थलों को भी ध्यान में रखा जाए। इसका उद्देश्य शहर के अलग-अलग हिस्सों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करना और नागरिकों को निजी वाहनों के स्थान पर सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन का विकल्प देना है।

बस रूट तय करने से पहले यात्री आवागमन, संभावित मांग और कनेक्टिविटी का विस्तृत सर्वे कराने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही पीपीपी मॉडल के तहत बस स्टॉप विकसित करने की संभावनाओं का आकलन करने तथा यात्रियों की वास्तविक जरूरत के अनुसार बस स्टॉप निर्धारित करने को कहा गया।

यात्रियों की क्षमता के अनुरूप होगा किराया

प्रमुख सचिव ने ई-बस सेवा के किराए को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किराया ऐसा हो जो आम नागरिकों की भुगतान क्षमता के अनुरूप हो और सार्वजनिक परिवहन को अधिक आकर्षक बनाए।

ई-बस सेवा को तकनीक आधारित बनाने पर भी जोर दिया गया। बसों की उपलब्धता, रूट, बस स्टॉप और यात्री सुविधाओं से जुड़ी जानकारी को डिजिटल माध्यमों से उपलब्ध कराने की दिशा में कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया, ताकि यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का बेहतर अनुभव मिल सके।

पीएम आवास योजना के लंबित मकानों पर विशेष अभियान

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के तहत निर्माणाधीन मकानों को 30 सितंबर 2026 तक पूरा कराने का लक्ष्य रखा गया है। प्रमुख सचिव ने नगरीय निकायों को शेष आवासों की संख्या के आधार पर साप्ताहिक लक्ष्य निर्धारित कर विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि जिन निकायों में आवास निर्माण की गति अपेक्षाकृत कम है, वहां स्थानीय स्तर पर आ रही बाधाओं की पहचान कर उनका तत्काल समाधान किया जाए। जिला प्रशासन और नगरीय निकायों के बीच बेहतर तालमेल के जरिए लंबित आवासों को निर्धारित समय में पूरा करने पर जोर दिया गया।

जिला कलेक्टरों को भी अपने-अपने जिलों में शेष आवासों के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय करने और नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए। निर्माण कार्य में आने वाली तकनीकी, प्रशासनिक या अन्य समस्याओं का समय पर निराकरण करने के साथ हितग्राहियों को निर्माण की वास्तविक प्रगति के आधार पर पात्रतानुसार किस्त की राशि समय पर उपलब्ध कराने को कहा गया।

कचरे से बिजली बनाने वाली परियोजनाओं में वित्तीय स्थिरता जरूरी

स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत प्रस्तावित वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं की व्यवहार्यता पर भी बैठक में विस्तार से विचार किया गया। चिन्हित क्लस्टरों की तकनीकी क्षमता और वित्तीय संरचना की समीक्षा करते हुए सोनमणि बोरा ने कहा कि कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए ऐसी परियोजनाएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनके संचालन के लिए दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता भी सुनिश्चित करना आवश्यक है।

उन्होंने अधिकारियों को परियोजनाओं से राज्य सरकार और नगरीय निकायों पर पड़ने वाले संभावित वित्तीय दायित्व का विस्तृत आकलन तैयार करने को कहा। भविष्य में संचालन, रखरखाव और अन्य आवश्यक खर्चों को ध्यान में रखते हुए वास्तविक वित्तीय आवश्यकता का अनुमान लगाने के निर्देश भी दिए गए।

PPP मॉडल में निजी भागीदारी की संभावनाएं तलाशने के निर्देश

वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी को लेकर भी चर्चा हुई। प्रमुख सचिव ने संभावित निजी भागीदारों की तकनीकी क्षमता, निवेश में रुचि और परियोजना से जुड़ी अपेक्षाओं का अध्ययन करने को कहा।

उन्होंने सरकार, नगरीय निकाय और निजी क्षेत्र के बीच जिम्मेदारियों तथा वित्तीय हिस्सेदारी को स्पष्ट और संतुलित रखने पर जोर दिया। अधिकारियों को परियोजना के प्रस्ताव को जल्द अंतिम रूप देकर आगे की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए।

15वें वित्त आयोग की राशि से जरूरत आधारित विकास पर जोर

बैठक में 15वें वित्त आयोग से मिलने वाली राशि के उपयोग की भी समीक्षा की गई। प्रमुख सचिव ने कहा कि नगरीय निकायों को उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल केवल अलग-अलग कार्य कराने तक सीमित न रखते हुए शहर की दीर्घकालिक जरूरतों के आधार पर करना चाहिए।

उन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सुविधाओं और वास्तविक आवश्यकताओं का आकलन कर प्राथमिकता तय करने के निर्देश दिए, ताकि सीमित वित्तीय संसाधनों से अधिकतम जनहित सुनिश्चित हो सके।

सड़कों के विकास में समग्र प्लानिंग अपनाने की जरूरत

सड़क निर्माण और उन्नयन के कार्यों को लेकर प्रमुख सचिव ने समग्र दृष्टिकोण अपनाने की बात कही। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सड़कों के कार्यों को अलग-अलग हिस्सों में बिखरे तरीके से करने के बजाय शहर की वर्तमान जरूरतों और भविष्य की यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए योजना बनाई जाए।

सड़क की स्थिति, यातायात दबाव, क्षेत्र की कनेक्टिविटी और नागरिकों की जरूरतों के आधार पर कार्यों की प्राथमिकता तय करने पर जोर दिया गया।

गैप एनालिसिस के आधार पर होगा विकास कार्यों का चयन

नगरीय निकायों में सैचुरेशन आधारित विकास को लेकर भी प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की स्थिति का विस्तृत आकलन किया जाना चाहिए।

इसके लिए सड़क, नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और अन्य आवश्यक शहरी सुविधाओं में मौजूद कमियों की पहचान करते हुए गैप एनालिसिस तैयार करने को कहा गया। इसके आधार पर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का चयन कर कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

प्रमुख सचिव ने कहा कि योजनाओं का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य पूरा करना नहीं, बल्कि नागरिकों को वास्तविक और दीर्घकालिक सुविधा उपलब्ध कराना होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को सभी योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करते हुए निर्धारित लक्ष्यों को तय समय-सीमा में पूरा करने और प्रत्येक परियोजना की वित्तीय तथा व्यावहारिक स्थिरता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।