रक्षाबंधन से पहले बहनों को आर्थिक संबल, महतारी वंदन की 30वीं किस्त से बढ़ी खुशियां
रायपुर। रक्षाबंधन के पर्व से पहले छत्तीसगढ़ की महिलाओं के बैंक खातों में महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त पहुंचने से घर-परिवार में उत्साह का माहौल है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 7 अगस्त 2026 को योजना की 30वीं किस्त जारी की। इसके साथ ही योजना के तहत अब तक पात्र महिलाओं के खातों में 19,444 करोड़ 33 लाख रुपये से अधिक की राशि अंतरित की जा चुकी है।
हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की यह सहायता महिलाओं के लिए केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है। कई परिवारों में यह राशि बच्चों की पढ़ाई, घरेलू आवश्यकताओं, पोषण और स्वास्थ्य संबंधी खर्चों में सहायक बन रही है। वहीं अनेक महिलाएं नियमित सहायता से बचत कर छोटे व्यवसाय और स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।
रक्षाबंधन से पहले मिली राशि बनी पर्व की तैयारी का सहारा
भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन इस बार महतारी वंदन की किस्त के साथ कई महिलाओं के लिए और खास बन गया है। खाते में राशि पहुंचने के बाद महिलाएं राखी, मिठाई और उपहार की खरीदारी के साथ घर की जरूरी चीजों पर भी खर्च की योजना बना रही हैं।
महिलाओं के अनुसार, नियमित रूप से मिलने वाली राशि उन्हें अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए परिवार पर पूरी तरह निर्भर रहने की स्थिति से बाहर निकलने में मदद करती है। उनके लिए यह सहायता आर्थिक सहयोग के साथ निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ाती है।
घरेलू जरूरतों से बच्चों की पढ़ाई तक पहुंचा लाभ
सूरजपुर जिले की तेज कुमारी, मंजू रजवाड़े, पुनिया प्रजापति, शहनाज बेगम, गणेश्वरी प्रजापति, मेनका रजवाड़े और लता केंवट सहित कई लाभार्थी महिलाओं ने बताया कि योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग वे बच्चों की शिक्षा, कॉपी-किताब, पौष्टिक भोजन और रोजमर्रा की आवश्यकताओं को पूरा करने में कर रही हैं।
रक्षाबंधन जैसे अवसरों पर भी यही राशि उनके लिए अतिरिक्त सहारा बन रही है। नियमित आर्थिक सहायता से महिलाएं अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार खर्च का प्रबंधन कर पा रही हैं।
छोटी बचत से शुरू हुआ स्वरोजगार का सफर
महतारी वंदन योजना का असर कई महिलाओं के लिए घरेलू बजट से आगे बढ़कर आजीविका के नए अवसर पैदा करने वाला साबित हुआ है। कुछ महिलाओं ने किस्त की राशि को धीरे-धीरे जमा कर अपने लिए रोजगार का साधन तैयार किया।
मुंगेली विकासखंड के ग्राम घुठेरा की अनीता गंधर्व ने योजना से प्राप्त राशि की बचत कर मुंगेली के पुराना बस स्टैंड क्षेत्र में मनिहारी और सिलाई की दुकान शुरू की। अब वे अपने काम से प्रतिदिन करीब 500 से 1,000 रुपये तक आय अर्जित कर रही हैं। उनकी आमदनी से बच्चों की पढ़ाई और परिवार के खर्च में भी सहयोग मिल रहा है।
जांजगीर-चांपा के ग्राम सरखों की शबीना बेगम ने अपनी चूड़ी की दुकान में नया स्टॉक बढ़ाने के लिए योजना की राशि का उपयोग किया। नए सामान की उपलब्धता से उनकी दुकान में ग्राहकों की संख्या और आमदनी बढ़ने की जानकारी सामने आई है।
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर की गायत्री श्रीवास्तव ने बचत की राशि से सेकेंड हैंड सिलाई-पिको मशीन खरीदी। अब वे सिलाई के साथ पिको का काम भी कर रही हैं। रायगढ़ की राशी कंवर ने भी योजना की किस्तों से सिलाई मशीन खरीदकर उसे अपनी आजीविका का माध्यम बनाया है।
बचत के साथ भविष्य की तैयारी
योजना की राशि का उपयोग महिलाएं केवल वर्तमान जरूरतों के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिए भी कर रही हैं। कोरबा की शकुंतला कुर्रे बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं के साथ अपनी बेटी ध्रीयांशी के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में बचत कर रही हैं।
सक्ती की हेमंत बंजारे, मोहला की देवकी निषाद और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर की अनीता गुप्ता जैसी महिलाएं भी योजना की सहायता से घरेलू खर्च और छोटे व्यवसायों को आगे बढ़ाने में सहयोग ले रही हैं।
30 किस्तों से मजबूत हुआ आर्थिक भरोसा
1 मार्च 2024 से शुरू हुई महतारी वंदन योजना के तहत लगातार 30 किस्तों का भुगतान महिलाओं के लिए नियमित आर्थिक सहायता का आधार बना है। प्रतिमाह मिलने वाली राशि ने कई परिवारों में खर्च और बचत की बेहतर योजना बनाने में मदद की है।
नियमित सहायता के कारण कुछ महिलाएं छोटी-छोटी बचत को जोड़कर सिलाई, मनिहारी, चूड़ी कारोबार और अन्य घरेलू व्यवसायों में निवेश कर रही हैं। इससे परिवार की आय में अतिरिक्त योगदान की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।
आर्थिक सहायता से बढ़ रहा आत्मविश्वास
महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं के हाथ में सीधे राशि पहुंचने से घरेलू स्तर पर उनकी आर्थिक भागीदारी मजबूत होने का दावा राज्य सरकार कर रही है। बच्चों की शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च के साथ महिलाओं द्वारा बचत और स्वरोजगार की दिशा में उठाए जा रहे कदम योजना के व्यापक प्रभाव को दर्शाते हैं।
रक्षाबंधन से पहले जारी हुई 30वीं किस्त ने इस आर्थिक सहयोग को पर्व की खुशियों से जोड़ दिया है। कई परिवारों के लिए यह राशि त्योहार की तैयारियों के साथ-साथ जरूरी खर्चों के प्रबंधन में भी सहायक बन रही है।
महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त के साथ सामने आई ये कहानियां बताती हैं कि नियमित आर्थिक सहायता महिलाओं के लिए केवल तत्काल खर्च का साधन नहीं, बल्कि बचत, छोटे कारोबार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी बन सकती है।
