‘एक मांग, एक मंच’ के बैनर तले कर्मचारियों का जोरदार प्रदर्शन
पांच सूत्रीय मांगों को लेकर इंद्रावती भवन के बाहर गूंजे नारे, मांगें पूरी नहीं हुईं तो 30 अक्टूबर को मंत्रालय घेराव
रायपुर। प्रदेश के विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राजधानी रायपुर में एकजुट होकर आवाज बुलंद की। इंद्रावती भवन के मुख्य द्वार के सामने ‘एक मांग, एक मंच’ अभियान के तहत आयोजित सांकेतिक प्रदर्शन में प्रदेशभर से पहुंचे 55 कर्मचारी संघों के प्रतिनिधियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और पांच सूत्रीय मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई।
प्रदर्शन में कर्मचारियों ने कहा कि लंबे समय से लंबित मांगों के निराकरण को लेकर सरकार को ठोस निर्णय लेना चाहिए। कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
इन पांच मांगों को लेकर कर्मचारियों ने उठाई आवाज
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारी संगठनों ने पांच प्रमुख मांगों को प्रमुखता से सामने रखा। इनमें अनियमित कर्मचारियों को मोदी की गारंटी के अनुरूप नियमित करने, नगरीय निकायों के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने और स्वास्थ्य विभाग में चल रही ठेका व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने की मांग शामिल रही।
इसके अलावा नियमित कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए मध्य प्रदेश की तर्ज पर 20 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने तथा जनवरी 2026 की स्थिति के अनुसार कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए महंगाई भत्ते का आदेश जारी करने की मांग भी रखी गई।
कर्मचारी नेताओं ने प्रदर्शन को किया संबोधित
सांकेतिक प्रदर्शन के दौरान कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों और नेताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में विचार रखे। प्रदर्शन को डॉ. डीपी मनहर, करन सिंह अटेरिया, जयनारायण श्रीवास्तव, अनिल शुक्ला, गोपाल साहू, अनिल पांडेय, महेंद्र सिंह राजपूत, सुजान बिंद, बीजापुर से अंजू गोरला, विकास सिंह राजपूत, संजय तिवारी, पीआर साहू, शरद दुबे, ओपी शर्मा, अनिल पांडे और ऋषिकांत मोहरे सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया।
कार्यक्रम का संचालन विद्याभूषण दुबे ने किया, जबकि जितेंद्र सिंह ने आभार व्यक्त किया।
प्रदर्शन स्थल पर गूंजते रहे मांगों के नारे
कर्मचारियों ने प्रदर्शन के दौरान अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शन स्थल पर “अनियमित कर्मचारियों को नियमित करो”, “स्वास्थ्य विभाग में ठेका प्रथा बंद करो”, “डीए देना होगा”, “डीए एरियर्स लेकर रहेंगे”, “कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करो” और “नगरीय निकायों में पुरानी पेंशन लागू करो” जैसे नारे लगातार गूंजते रहे।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार को जल्द निर्णय लेना चाहिए। उनका कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों के कारण कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो 30 अक्टूबर को मंत्रालय घेराव
सांकेतिक प्रदर्शन के बाद कर्मचारी संगठनों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में आंदोलन की आगामी रणनीति पर चर्चा करते हुए सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि सरकार की ओर से पांच सूत्रीय मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 30 अक्टूबर को मंत्रालय घेराव किया जाएगा।
कर्मचारी संगठनों ने कहा कि वर्तमान प्रदर्शन सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करने के लिए किया गया है। मांगों का समाधान नहीं होने की स्थिति में आगामी आंदोलन को और व्यापक रूप देने की तैयारी की जाएगी।
