ईद-उल-अज़हा पर खुले क्षेत्रों में न करें कुर्बानी, सभी समाज की आस्था का रखें सम्मान – डॉ. सलीम राज

रायपुर। आगामी 28 मई 2026 गुरुवार को पूरे देश में Eid al-Adha का पर्व मनाया जाएगा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ में सुबह 6 बजे से 11 बजे तक विभिन्न मस्जिदों और ईदगाहों में निर्धारित समयानुसार ईद की नमाज़ अदा की जाएगी तथा एक-दूसरे को मुबारकबाद दी जाएगी।
इस संबंध में डॉ. सलीम राज ने मुस्लिम समाज से अपील करते हुए कहा है कि ईद-उल-अज़हा का त्योहार हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम और हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म हमें आपसी भाईचारे, मोहब्बत, सामाजिक सौहार्द और सभी धर्मों की आस्था का सम्मान करना सिखाता है।
उन्होंने कहा कि पैगम्बर साहब ने भी यह संदेश दिया है कि जिस देश में हम रहते हैं, वहां के संविधान और आसपास रहने वाले सभी लोगों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
डॉ. सलीम राज ने कहा कि कई बार कुछ लोग खुले क्षेत्रों या सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी करते हैं अथवा उसकी फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करते हैं, जिससे अन्य समाज के लोगों की भावनाएं आहत होती हैं और सामाजिक वातावरण प्रभावित होता है।
उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि ईद-उल-अज़हा के अवसर पर खुले या सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी न करें, प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी से बचें और कुर्बानी से जुड़े फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर साझा न करें। साथ ही कुर्बानी के बाद साफ-सफाई बनाए रखें, खून को नालियों में न बहाएं तथा अपशिष्ट पदार्थों को गड्ढा खोदकर उचित तरीके से दफनाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि सड़क पर नमाज़ अदा करने से बचें और यदि नमाज़ियों की संख्या अधिक हो तो पूर्व वर्षों की तरह पालियों में नमाज़ की व्यवस्था की जाए। उन्होंने सभी से आपसी भाईचारा और साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखते हुए त्योहार मनाने की अपील की।

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