दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ शराब नीति घोटाले में केस चलाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को अनुमति मिल गई है। दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने 16 दिसंबर को इस अनुमति पर दस्तखत किए। ED ने 5 दिसंबर को एलजी से केस चलाने की अनुमति मांगी थी, और आरोप लगाया था कि शराब नीति के कार्यान्वयन के दौरान भ्रष्टाचार हुआ।
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने 6 नवंबर को फैसला सुनाया था कि पब्लिक सर्वेंट के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत केस चलाने के लिए सरकार की अनुमति जरूरी है। ED की यह प्रक्रिया 4 महीनों तक लटकी रही, लेकिन अब मंजूरी मिल चुकी है। इस निर्णय के बाद, मनीष सिसोदिया ने प्रतिक्रिया दी, और कहा कि ED को अनुमति की कॉपी सार्वजनिक करनी चाहिए।
इससे पहले, 9 जुलाई को ट्रायल कोर्ट ने ED द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट पर संज्ञान लिया था और कहा था कि केजरीवाल के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी थी, लेकिन उनकी याचिका खारिज हो गई। इसके बाद, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां कोर्ट ने उनके हक में फैसला सुनाया।
इस पूरे मामले में, केजरीवाल 156 दिन तक तिहाड़ जेल में रहे थे, जिसमें 21 मार्च को ED ने उन्हें गिरफ्तार किया था। बाद में, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 13 सितंबर को जमानत दी, और उन्होंने जेल में बिताए गए दिनों के बाद बाहर आकर अपनी राजनीति को जारी रखा।