कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, अंतरराष्ट्रीय बाजार में 9% तक लुढ़का भाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। हालिया कारोबार के दौरान क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 9 प्रतिशत गिरकर करीब 88 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई। विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक बाजार में यह गिरावट भू-राजनीतिक तनाव से जुड़े हालिया बयानों और निवेशकों की बदली धारणा के कारण देखी गई है।

ट्रम्प के बयान के बाद बाजार में हलचल

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस बयान के बाद बाजार में तेजी से प्रतिक्रिया देखने को मिली, जिसमें उन्होंने कहा कि जारी युद्ध या तनाव जल्द समाप्त हो सकता है। इस बयान के बाद निवेशकों के बीच यह धारणा बनी कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव कम हो सकता है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई।

ऊर्जा बाजार में अक्सर भू-राजनीतिक घटनाओं और नेताओं के बयानों का सीधा असर देखने को मिलता है। इसी कारण तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया।

भारतीय शेयर बाजार में तेजी

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सकारात्मक असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखा गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 500 अंक की बढ़त के साथ ऊपर चढ़ गया।

विश्लेषकों का मानना है कि तेल की कीमतों में कमी भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए राहत लेकर आती है। इससे महंगाई पर दबाव कम हो सकता है और आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिल सकती है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है कच्चा तेल

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से देश की आयात लागत कम होती है, जिससे सरकार और उद्योग दोनों को राहत मिलती है।

तेल सस्ता होने से परिवहन लागत कम होने की संभावना रहती है और इसका असर पेट्रोल, डीजल तथा अन्य ऊर्जा से जुड़े क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है।

आगे भी रह सकती है बाजार पर नजर

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीतिक हालात, उत्पादन स्तर और प्रमुख तेल उत्पादक देशों के फैसलों के आधार पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

फिलहाल बाजार की नजर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और वैश्विक मांग–आपूर्ति के संतुलन पर बनी हुई है, जो तेल की कीमतों की दिशा तय करेंगे।