जनस्वास्थ्य में छत्तीसगढ़ का राष्ट्रीय डंका: फाइलेरिया-मलेरिया उन्मूलन मॉडल को मिला सम्मान
रायपुर । जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। राज्य को फाइलेरिया और मलेरिया उन्मूलन के लिए अपनाई गई नवाचारी एवं प्रभावी रणनीतियों पर राष्ट्रीय सम्मान मिला है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था, दूरदर्शी योजनाओं और जमीनी स्तर पर किए गए सफल कार्यों का प्रमाण मानी जा रही है।
30 अप्रैल और 01 मई 2026 को चंडीगढ़ में आयोजित “नवाचार और समावेशिता पर राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन – भारत के भविष्य को आकार देने वाली सर्वोत्तम पद्धतियाँ” में छत्तीसगढ़ को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया। सम्मेलन में देशभर के राज्यों की उत्कृष्ट योजनाओं और सफल मॉडलों को प्रस्तुत किया गया, जहां छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग की पहलें विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।
राज्य ने फाइलेरिया और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों के उन्मूलन के लिए जनजागरूकता अभियान, समय पर जांच, दवा वितरण, घर-घर सर्वे, मोबाइल हेल्थ यूनिट, हाई-रिस्क क्षेत्रों की निगरानी तथा सामुदायिक सहभागिता जैसे कई प्रभावी कदम उठाए। इन्हीं प्रयासों के कारण छत्तीसगढ़ का मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बनकर उभरा है।
विशेषज्ञों ने माना कि छत्तीसगढ़ ने स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने, दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और स्थानीय समुदायों को अभियान से जोड़ने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के लाखों स्वास्थ्य कर्मियों, मितानिनों, डॉक्टरों और प्रशासनिक टीम के समर्पण का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है। राज्य सरकार ने इसे जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि भविष्य में भी इसी प्रतिबद्धता के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया जाएगा।
