सुरक्षा का बदला पैटर्न: छत्तीसगढ़ के 7 जिलों से SIB टीमों की वापसी, अब ‘अर्बन नक्सल’ और सोशल मीडिया पर पुलिस का फोकस

रायपुर: छत्तीसगढ़ पुलिस ने राज्य की आंतरिक सुरक्षा और नक्सल विरोधी रणनीति (Anti-Naxal Strategy) को लेकर एक बेहद बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है। राज्य में लगातार बदलते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए पुलिस महानिदेशालय ने अपनी सुरक्षा रणनीति का पैटर्न बदल दिया है। इसके तहत राज्य के जिन 7 जिलों में नक्सली गतिविधियां अब पूरी तरह से शांत और नियंत्रण में हो चुकी हैं, वहां से एसआईबी (Special Intelligence Bureau) की फील्ड टीमों को वापस बुला लिया गया है।

घने जंगलों के बजाय अब ‘शहरी नेटवर्क’ पर पैनी नजर

सुरक्षा एजेंसियों के इस नए कदम के बाद अब छत्तीसगढ़ पुलिस का पूरा फोकस घने जंगलों और कोर नक्सल क्षेत्रों के साथ-साथ शहरों में सक्रिय संदिग्धों पर शिफ्ट हो गया है। पुलिस अब ‘अर्बन नक्सल नेटवर्क’ (शहरी नक्सली नेटवर्क) को ध्वस्त करने पर विशेष ध्यान केंद्रित करेगी। खुफिया इनपुट के आधार पर शहरों में बैठकर नक्सलियों को रसद, फंडिंग, कानूनी और वैचारिक मदद पहुंचाने वाले संदिग्ध नेटवर्क पर पैनी नजर रखी जाएगी।

सोशल मीडिया की होगी सख्त मॉनिटरिंग

बदली हुई रणनीति के तहत पुलिस का दूसरा सबसे बड़ा हथियार डिजिटल सर्विलांस होगा। नक्सली विचारधारा के प्रचार-प्रसार, युवाओं को भ्रमित करने और भड़काऊ पोस्ट के जरिए अशांति फैलाने की कोशिशों को रोकने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की चौबीसों घंटे सख्त मॉनिटरिंग (निगरानी) की जाएगी।

क्यों लिया गया यह फैसला?

वरिष्ठ अधिकारियों के सूत्रों के मुताबिक, जिन जिलों को पूरी तरह से नक्सल मुक्त या ‘ग्रीन ज़ोन’ मान लिया गया है, वहां अब पारंपरिक खुफिया टीमों की उतनी आवश्यकता नहीं रह गई थी। ऐसे में उन संसाधनों और दक्ष अधिकारियों का उपयोग अब साइबर स्पेस और अर्बन नेटवर्क को क्रैक करने में किया जाएगा, जो वर्तमान समय में सुरक्षा के लिहाज से एक नई चुनौती बनकर उभर रहे हैं। पुलिस का मानना है कि इस नए पैटर्न से न केवल मैदानी स्तर पर बल्कि वैचारिक और डिजिटल स्तर पर भी नक्सलवाद की कमर तोड़ी जा सकेगी।