हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: आंधी में पेड़ गिरने से मौत भी ‘प्राकृतिक आपदा’, पीड़ित परिवार को ₹4 लाख मुआवजा देने का आदेश

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (Bilaspur High Court) ने आम जनता के हित में एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ किया है कि आंधी-तूफान के दौरान यदि किसी व्यक्ति पर पेड़ गिर जाता है और उसकी मौत हो जाती है, तो ऐसी घटना को भी प्राकृतिक आपदा (Natural Calamity) की श्रेणी में माना जाएगा। इस फैसले के बाद अब पीड़ित परिवार मुआवजे के हकदार होंगे।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला एक पीड़ित परिवार से जुड़ा है, जिसने आंधी में पेड़ गिरने से अपने सदस्य को खो दिया था। इस दुखद हादसे के बाद जब परिवार ने मुआवजे के लिए आवेदन किया, तो राजस्व विभाग (Revenue Department) ने उनके दावे को यह कहकर खारिज कर दिया था कि यह घटना प्राकृतिक आपदा के कड़े और तय नियमों के दायरे में फिट नहीं बैठती है। विभाग के इस रुख के खिलाफ पीड़ित परिवार ने न्याय के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

अदालत का आदेश: राजस्व विभाग का तर्क खारिज

मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने राजस्व विभाग की दलीलों और तकनीकी अड़चनों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि आंधी-तूफान एक प्राकृतिक घटना है और उसके प्रभाव से पेड़ का गिरना भी उसी का हिस्सा है।

₹4 लाख मुआवजा देने के निर्देश: हाई कोर्ट ने पीड़ित परिवार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए संबंधित विभाग को आदेश जारी किया है कि वे नियमों का हवाला देकर मुआवजा न रोकें और पीड़ित परिवार को तत्काल ₹4 लाख की मुआवजा राशि का भुगतान करें।

इस फैसले का दूरगामी असर

हाई कोर्ट का यह बड़ा फैसला आने वाले समय के लिए एक मिसाल (Precedent) बनेगा। अक्सर देखा जाता है कि चक्रवात, आंधी या भारी बारिश के दौरान पेड़ या बिजली के खंभे गिरने से हादसे हो जाते हैं, लेकिन तकनीकी बारीकियों के कारण पीड़ितों को सरकारी मदद मिलने में लंबा वक्त लग जाता है। अदालत के इस रुख से अब ऐसे मामलों में पीड़ितों को न्याय और आर्थिक राहत मिलना बेहद आसान हो जाएगा।