छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग में बड़ा खुलासा: 10 हजार ‘गुरुजी’ स्कूलों से गायब, कोई कलेक्टोरेट में बाबू बना तो कोई विधायक का PA; ऑनलाइन हाजिरी से खुला पोल

रायपुर: छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में वर्षों से खामोशी के साथ फल-फूल रहा ‘संलग्नीकरण उद्योग’ (अटैचमेंट का खेल) आखिरकार एक मोबाइल स्क्रीन पर आकर अटक गया है। जिस खेल को खत्म करने के लिए हर साल कागजी आदेश निकलते रहे, वह इस बार किसी जांच समिति या प्रशासनिक सख्ती से नहीं, बल्कि विभाग द्वारा शुरू की गई ऑनलाइन हाजिरी की एक क्लिक से बेनकाब हो गया है।

सामने आया है कि प्रदेश में करीब 10 हजार से ज्यादा शिक्षक, बाबू और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अपनी मूल पदस्थापना वाले स्कूलों को छोड़कर दूसरे विभागों में मजे से काम कर रहे हैं। कोई कलेक्टोरेट और तहसील में जन्म प्रमाण-पत्र बना रहा है, कोई बाढ़ नियंत्रण कक्ष में तैनात है, तो कोई पंचायत कार्यालय में बाबूगिरी कर रहा है। हद तो यह है कि कई शिक्षक बिना पात्रता के जनप्रतिनिधियों के निजी स्टाफ (PA) तक बने हुए हैं।

मैदान छोड़ दफ्तरों में फाइलें दौड़ा रहे पीटी (व्यायाम) टीचर

इस संलग्नीकरण उद्योग का सबसे दिलचस्प और चिंताजनक चेहरा व्यायाम शिक्षकों (PTIs) का है। जिनकी मूल जिम्मेदारी बच्चों को खेल, व्यायाम और शारीरिक गतिविधियों से जोड़कर उनका भविष्य मजबूत करना है, वे कई जगह कलेक्टोरेट और पंचायत कार्यालयों में बैठकर फाइलों पर बाबूगिरी की ‘कसरत’ कर रहे हैं।

यह तब है, जब शिक्षा विभाग खुद बच्चों के लिए शनिवार को बाकायदा ‘बैगलेस डे’ मना रहा है ताकि बच्चे खेलें और दौड़ें। लेकिन विडंबना देखिए, जिन शिक्षकों को मैदान में सीटी बजानी चाहिए, वे खुद दफ्तरों में अफसरों की फाइलों की दौड़ में शामिल हैं।

यह शर्त पड़ी भारी: जहां पदस्थापना, वहीं से लगेगी हाजिरी

दरअसल, शिक्षा विभाग ने 1 जुलाई से शिक्षक, बाबू, चपरासी से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) तक पूरे अमले के लिए ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य कर दी है। इस व्यवस्था की सबसे अहम शर्त यह है कि हाजिरी केवल उसी स्कूल या कार्यालय के जियो-लोकेशन से लगेगी, जहां कर्मचारी की वास्तविक पदस्थापना है।

हाजिरी नहीं लगाने पर वेतन रोकने के कड़े निर्देश हैं। इस नियम के आते ही उन रसूखदारों में खलबली मच गई है जो 10-10 साल से दूसरे विभागों में मलाई काट रहे थे, जबकि उनका वेतन शिक्षा विभाग के बजट से निकल रहा था।

  • बिलासपुर का हाल: अकेले बिलासपुर जिले में 57 शिक्षकों का अवैध अटैचमेंट सामने आया है, जिसमें एक शिक्षक तो सीधे विधायक के पीए बने बैठे हैं।

  • कोंडागांव से चौंकाने वाला पत्र: कोंडागांव में तो सिस्टम को बचाने के लिए खुद कलेक्टर ने ही शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर संलग्नीकरण खत्म न करने की विशेष छूट मांग ली है। पत्र में तर्क दिया गया है कि कर्मचारियों की कमी के कारण फिलहाल इन्हें वहीं काम करने दिया जाए, जहां वे तैनात हैं।

संलग्नीकरण हर हाल में समाप्त होगा: शिक्षा सचिव

इस पूरे मामले के बेनकाब होने के बाद शिक्षा विभाग सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। सरकार का भी स्पष्ट निर्देश है कि अटैचमेंट खत्म होगा, वरना संबंधित कर्मचारियों को तनख्वाह नहीं मिलेगी।

“राज्य शासन के सभी निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। शिक्षा विभाग में भर्ती कर्मचारियों का अन्य जगहों पर संलग्नीकरण (अटैचमेंट) बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं है। इससे स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होती है। इसे समाप्त किया जाएगा।” – डॉ. कमलप्रीत सिंह, शिक्षा सचिव