छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन 2026 को लेकर सरकार अलर्ट: धान खरीदी और कृषि व्यवस्था को लेकर सहकारी समितियों को कड़े निर्देश
रायपुर: छत्तीसगढ़ में आगामी खरीफ सीजन 2026 की कृषि व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। किसानों को खेती-किसानी के समय किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े, इसके लिए धान खरीदी की अग्रिम व्यवस्थाओं और कृषि इनपुट्स की समीक्षा तेज कर दी गई है।
राज्य सरकार ने सभी जिलों की सहकारी समितियों (Cooperative Societies) को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि किसानों के लिए खाद, उन्नत बीज और अन्य आवश्यक सामग्रियों की उपलब्धता समय रहते सुनिश्चित की जाए।
खाद और बीज की उपलब्धता पर विशेष फोकस
खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही राज्य में खाद और बीज की मांग तेजी से बढ़ती है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने सोसायटियों में भंडारण (Stocking) की स्थिति सुधारने को कहा है:
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गुणवत्तापूर्ण बीज: किसानों को सोसायटियों के माध्यम से प्रमाणित और उच्च उपज देने वाले बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
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खाद का अग्रिम भंडारण: यूरिया, डीएपी (DAP) और एनपीके जैसी आवश्यक खादों का पर्याप्त कोटा सोसायटियों में पहुँचाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि ऐन वक्त पर किल्लत न हो।
धान खरीदी केंद्रों को लेकर भी दिशा-निर्देश
छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में धान की खेती का सबसे बड़ा योगदान है। खरीफ सीजन 2026 के मद्देनजर धान खरीदी केंद्रों की व्यवस्थाओं, बारदाने की उपलब्धता और चबूतरा निर्माण जैसे बुनियादी कार्यों की रूपरेखा भी अभी से तैयार की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में उपार्जन केंद्रों (Procurement Centers) पर किसानों को लंबी लाइनों या तौल में गड़बड़ी जैसी परेशानियों से न जूझना पड़े।
सरकार का सख्त रुख: यदि किसी भी सहकारी समिति या वितरण केंद्र में खाद-बीज की कालाबाजारी या वितरण में लापरवाही की शिकायत मिलती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ तत्काल और सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
किसानों की आय और सुरक्षा सर्वोपरि
कृषि विभाग के अधिकारियों को मैदानी स्तर पर जाकर लगातार सोसायटियों का निरीक्षण करने के आदेश दिए गए हैं। राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य किसानों को समय पर ऋण, खाद और बीज की आपूर्ति कर फसल उत्पादन को बढ़ावा देना और कृषि व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाना है।
