बिलासपुर हाईकोर्ट से राज्य सरकार को झटका, सारंगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष को हटाने का आदेश रद्द
बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार द्वारा सारंगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष को पद से हटाने और पांच वर्षों के लिए अयोग्य घोषित करने के आदेश को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना व्यक्तिगत दोष सिद्ध किए गए केवल सामूहिक निर्णयों के आधार पर किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को हटाना कानूनन उचित नहीं ठहराया जा सकता।
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 41-ए के तहत अध्यक्ष को हटाने की असाधारण शक्ति का प्रयोग तभी किया जा सकता है, जब गंभीर, स्पष्ट और व्यक्तिगत आरोप सिद्ध हों। साथ ही, किसी भी कार्रवाई से पहले प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पूर्ण पालन अनिवार्य है।
मामले में याचिकाकर्ता सोनी अजय बंजारे ने राज्य सरकार के 02 जुलाई 2025 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें सारंगढ़ नगर परिषद के अध्यक्ष पद से हटाकर आगामी कार्यकाल के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इससे पहले सिंगल बेंच ने याचिका खारिज कर दी थी, जिसे डिवीजन बेंच ने पलट दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि जिन निर्णयों को लेकर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए, वे नगर परिषद द्वारा सामूहिक रूप से लिए गए थे। इसके बावजूद केवल अध्यक्ष के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना भेदभावपूर्ण प्रतीत होता है। जांच रिपोर्ट में जिन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे, उनके विरुद्ध समान कार्रवाई नहीं की गई।
डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को भी रद्द करते हुए कहा कि सुनवाई की प्रक्रिया औपचारिक नहीं बल्कि प्रभावी होनी चाहिए। सभी संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए बिना और पूर्व-निर्धारित निष्कर्षों के आधार पर लिया गया निर्णय वैधानिक कसौटी पर खरा नहीं उतरता।
हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने आरोपों की merits पर कोई राय नहीं दी है। राज्य सरकार को कानून के तहत नया आदेश पारित करने की स्वतंत्रता दी गई है, बशर्ते कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष हो और याचिकाकर्ता को सुनवाई का समुचित अवसर प्रदान किया जाए।
