छत्तीसगढ़ में दो बड़े घोटालों का भंडाफोड़: भिलाई में शेयर व गोल्ड ETF के नाम पर 1000 करोड़ की महाठगी, कोंडागांव में 43 शिक्षक बने शिकार
भिलाई/कोंडागांव, 9 जुलाई 2026:
छत्तीसगढ़ में ठगी और वित्तीय धोखाधड़ी के दो बेहद सनसनीखेज मामले सामने आए हैं। दुर्ग-भिलाई में जहां शेयर ट्रेडिंग और गोल्ड ETF के नाम पर करीब 1000 करोड़ रुपये के महाघोटाले का पर्दाफाश हुआ है, वहीं कोंडागांव जिले में एक शातिर अंतरजिला गिरोह ने 43 शिक्षकों को लोन दिलाने के नाम पर 12 करोड़ रुपये की चपत लगा दी है। पुलिस ने दोनों ही मामलों में मुस्तैदी दिखाते हुए मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
[केस 1] भिलाई: ‘रकम डबल’ करने का झांसा देकर 1000 करोड़ की ठगी, आरोपी कोर्ट परिसर से गिरफ्तार
भिलाई के सुपेला थाना क्षेत्र में ‘एरिना कैपिटल’ और ‘योग अकाउंटिंग एंड फाइनेंशियल सर्विस’ नाम की फर्जी कंपनियों द्वारा इस बड़े स्कैम को अंजाम दिया गया।
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हर महीने 10% मुनाफे का लालच: मुख्य आरोपी योगेश साहू और उसके साथियों ने निवेशकों को शेयर बाजार और गोल्ड ETF (Exchange Traded Funds) में पैसा लगाने पर हर महीने 10% फिक्स प्रॉफिट देने और बहुत कम समय में रकम दोगुनी करने का सब्जबाग दिखाया था। शुरुआत में भरोसा जीतने के लिए कुछ पैसे दिए गए, लेकिन पिछले 10 महीनों से भुगतान पूरी तरह बंद था।
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पीड़ितों ने कोर्ट में घेरा: आरोपी योगेश साहू पहले से दर्ज मामलों में जमानत पर था। बुधवार को जब वह अपने वकील के साथ किसी अन्य काम से दुर्ग कोर्ट पहुंचा, तो पीड़ित निवेशकों को इसकी भनक लग गई। भारी संख्या में पहुंचे पीड़ितों ने उसे कोर्ट परिसर में ही दबोच लिया और पुलिस के हवाले कर दिया।
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इन पर दर्ज हुई FIR: सुपेला पुलिस ने मुख्य आरोपी योगेश साहू, मेघा साहू, गोविंद साहू, राजेंद्र साहू, पद्मा साहू, लोमश साहू, ज्ञानप्रकाश साहू और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। पीड़ितों का दावा है कि पूरे प्रदेश से करीब 1500 लोग इस जालसाजी का शिकार हुए हैं।
प्रमुख पीड़ित और उनकी फंसी हुई गाढ़ी कमाई:
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शदाब सिद्दीकी: ₹1.61 करोड़
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इन्द्रेश कुमार बांगरे: ₹1.12 करोड़
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विवेक सिंह व अन्य: करीब ₹1.5 करोड़
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राजू नामदेव (रिटायर्ड बीएसपी कर्मी): ₹15 लाख
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अरुण कुमार और प्रज्ञा दुबे: ₹63 लाख
[केस 2] कोंडागांव: लोन पास कराकर 43 शिक्षकों से 12 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी, 5 आरोपी दबोचे गए
दूसरा मामला कोंडागांव जिले से सामने आया है, जहां एक शातिर अंतरजिला गिरोह ने सरकारी शिक्षकों को अपना निशाना बनाया और बैंकों से लोन दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी की।

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ठगी का अनोखा तरीका: यह गिरोह शिक्षकों को विभिन्न बैंकों से आसानी से पर्सनल लोन दिलाने का लालच देता था। लोन स्वीकृत होने के बाद आरोपी कुल राशि का केवल 40% हिस्सा ही शिक्षकों को देते थे और शेष 60% रकम चालाकी से अपने खातों में ट्रांसफर करवा लेते थे।
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झांसे में आए शिक्षक: आरोपियों ने शिक्षकों को भरोसा दिया था कि वे खुद (HRA सहित) अगले 2-3 साल में पूरा लोन चुकता कर देंगे। शिक्षकों ने आंख मूंदकर दस्तावेजों पर दस्तखत कर दिए, जिसके बाद आरोपी पैसे लेकर फरार हो गए और बैंक लोन की पूरी EMI चुकाने का बोझ शिक्षकों के सिर आ गया।
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3 महीने की जांच के बाद बड़ी कामयाबी: फरसगांव और केशकाल पुलिस ने लगभग 3 महीने तक चली लंबी तकनीकी और वित्तीय जांच के बाद इस गिरोह के 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों को अंबिकापुर, जशपुर और सारंगढ़ से पकड़ा गया है।
