भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता अंतिम चरण में, अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement – FTA) लगभग अंतिम चरण में पहुंच गया है। यह समझौता दोनों पक्षों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को भारत के निर्यात, निवेश और रोजगार सृजन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि यह डील भारतीय उद्योगों को यूरोपीय बाजारों तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगी, जिससे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।
इस मुक्त व्यापार समझौते के तहत ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन एनर्जी जैसे प्रमुख क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। टैरिफ में कटौती और व्यापारिक बाधाओं को कम किए जाने से भारतीय उत्पाद यूरोपीय देशों में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता विदेशी निवेश को आकर्षित करने में भी अहम भूमिका निभाएगा। यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत एक बड़े उपभोक्ता बाजार और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर सकता है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि भारत–EU FTA न केवल द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत की दीर्घकालिक आर्थिक विकास रणनीति को भी मजबूती प्रदान करेगा। समझौते के लागू होने के बाद भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक सहयोग एक नए दौर में प्रवेश करेगा।
