भारत–EU व्यापार समझौते के तहत कार टैरिफ में संभावित कटौती, ऑटो सेक्टर में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के तहत ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सूत्रों के अनुसार, भारत आयातित कारों पर लगने वाले शुल्क को घटाकर लगभग 40 प्रतिशत तक करने पर विचार कर रहा है।

वर्तमान में भारत में विदेशी कारों पर अपेक्षाकृत अधिक आयात शुल्क लगाया जाता है, जिसका उद्देश्य घरेलू ऑटो उद्योग को संरक्षण देना है। संभावित टैरिफ कटौती से यूरोपीय ऑटो ब्रांड्स की भारतीय बाजार में एंट्री आसान होगी, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प और बेहतर तकनीक उपलब्ध हो सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारतीय ऑटो बाजार में प्रतिस्पर्धा तेज होगी। विदेशी कंपनियों के आने से कीमतों, गुणवत्ता और तकनीकी नवाचार के स्तर पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। साथ ही, स्थानीय मैन्युफैक्चरर्स पर अपनी दक्षता और उत्पादन मानकों को बेहतर बनाने का दबाव भी बढ़ेगा।

हालांकि, घरेलू ऑटो उद्योग से जुड़े कुछ वर्गों ने टैरिफ कटौती को लेकर सतर्कता जताई है। उनका कहना है कि यदि आयात शुल्क में कमी संतुलित तरीके से नहीं की गई, तो इसका असर स्थानीय विनिर्माण और रोजगार पर पड़ सकता है। ऐसे में नीति-निर्माताओं के सामने उद्योग संरक्षण और वैश्विक व्यापार संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी।

आर्थिक जानकारों के अनुसार, भारत–EU व्यापार समझौते के अंतर्गत कार टैरिफ में संभावित कटौती भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है।

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