टाटा ग्रुप में बड़ा बोर्डरूम विवाद: टाटा ट्रस्ट्स ने एन. चंद्रशेखरन के दूसरे कार्यकाल के लिए कास्टिंग वोट के इस्तेमाल को बताया गैर-कानूनी

मुंबई (21 सितम्बर 2026): देश के सबसे बड़े व्यावसायिक घरानों में से एक टाटा समूह (Tata Group) में एक बार फिर शीर्ष प्रबंधन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) ने टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन (N. Chandrasekaran) द्वारा खुद को दोबारा चेयरमैन पद पर नियुक्त करने के लिए कास्टिंग वोट (Casting Vote) के इस्तेमाल को गैर-कानूनी करार दिया है।

टाटा ट्रस्ट्स ने जताई कड़ी आपत्ति

सूत्रों के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स के बोर्ड सदस्यों ने आरोप लगाया है कि टाटा संस के चेयरमैन के रूप में दूसरे कार्यकाल का पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव पारित कराने के लिए प्रक्रियात्मक नियमों का उल्लंघन किया गया है। ट्रस्ट का तर्क है कि ऐसे महत्वपूर्ण फैसलों में कास्टिंग वोट का इस्तेमाल कंपनी के अनुच्छेदों (Articles of Association) और स्थापित गवर्नेंस मानकों के खिलाफ है।

शीर्ष नेतृत्व के बीच बढ़ा तनाव

इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने टाटा संस और मुख्य शेयरधारक टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेदों को सतह पर ला दिया है। टाटा ट्रस्ट्स, जिसकी टाटा संस में लगभग 66% हिस्सेदारी है, समूह के दीर्घकालिक निर्णयों और कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर कड़ा नियंत्रण रखता है।

आगे क्या हो सकता है?

प्रबंधन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस विवाद को आपसी बातचीत से नहीं सुलझाया गया, तो मामला कानूनी कानूनी औपचारिकताओं या असाधारण आम बैठक (EGM) तक पहुँच सकता है। फिलहाल टाटा संस और एन. चंद्रशेखरन के कार्यालय से इस पर आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है।