मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में बाल संरक्षण की नई पहल, फॉस्टर केयर से बालक को मिला परिवार का सहारा

रायपुर, 27 अगस्त 2026।
बाल संरक्षण और पुनर्वास के क्षेत्र में मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले ने एक उल्लेखनीय पहल की है। जिला प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समन्वित प्रयासों से जिले में पहली बार एक बालक का सफलतापूर्वक फॉस्टर केयर (पोषण देखरेख) के माध्यम से पुनर्वास किया गया। संस्थागत देखरेख में रह रहे बालक को अब सुरक्षित पारिवारिक माहौल, स्नेह और संरक्षण मिल रहा है।

यह पहल इस बात का उदाहरण है कि जरूरतमंद बच्चों के सर्वोत्तम हित को केंद्र में रखकर वैकल्पिक देखरेख व्यवस्था के जरिए उनके जीवन को बेहतर दिशा दी जा सकती है।

विशेष अभियान के दौरान हुआ बालक का रेस्क्यू

कलेक्टर तनुजा सलाम के निर्देशन में तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं जिला बाल संरक्षण अधिकारी के मार्गदर्शन में जून 2026 में संकटपूर्ण परिस्थितियों में रह रहे बच्चों की पहचान, रेस्क्यू और पुनर्वास के लिए विशेष अभियान संचालित किया गया था।

इसी अभियान के दौरान श्रम विभाग, पुलिस विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त टीम ने एक स्थानीय ढाबे से बालक को सुरक्षित बाहर निकाला। जांच के दौरान सामने आया कि बालक के माता-पिता और दादा-दादी का निधन हो चुका है। ऐसे में उसे तत्काल संरक्षण प्रदान करने के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद उसे बालगृह भेजा गया।

बालक की इच्छा बनी पुनर्वास की आधारशिला

बालगृह में काउंसलिंग के दौरान बालक ने संस्थागत वातावरण की अपेक्षा परिवार के बीच रहने की इच्छा व्यक्त की। उसकी भावनात्मक जरूरतों और भविष्य को ध्यान में रखते हुए जिला बाल संरक्षण इकाई ने फॉस्टर केयर के माध्यम से उसे पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की।

जिला बाल संरक्षण इकाई के सामाजिक कार्यकर्ता एवं संरक्षण अधिकारी (गैर-संस्थागत देखरेख) ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन अल्टरनेटिव केयर (इंडिया), दुर्ग संभाग के समन्वय से बालक के दूर के रिश्तेदारों से संपर्क स्थापित किया। काउंसलिंग और आवश्यक चर्चा के बाद रिश्तेदारों ने बालक को अपने परिवार में रखने तथा उसकी शिक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी उठाने पर सहमति दी।

सत्यापन के बाद पूरी हुई कानूनी प्रक्रिया

बालक को परिवार के सुपुर्द करने से पहले संभावित पोषण परिवार की पूरी तरह जांच की गई। इसके तहत गृह अध्ययन, साक्षात्कार और पात्रता का सत्यापन किया गया। बालक के आवश्यक दस्तावेज भी तैयार कराए गए, जिसमें आधार कार्ड बनवाना शामिल था।

किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद बाल कल्याण समिति की अनुशंसा और जिला प्रशासन की स्वीकृति प्राप्त की गई। इसके पश्चात बालक को विधिवत पोषण परिवार को सौंप दिया गया। पूरी प्रक्रिया में बालक की सुरक्षा, भावनात्मक जरूरतों और सर्वोत्तम हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई।

अब परिवार के बीच आगे बढ़ रहा बालक

फॉस्टर केयर के जरिए बालक को अब संस्थागत जीवन से निकलकर परिवार का अपनापन और भावनात्मक सहारा मिल रहा है। वह अपने नए परिवार के साथ सुरक्षित वातावरण में रह रहा है और नियमित रूप से स्कूल जाकर पढ़ाई कर रहा है।

पोषण परिवार उसकी शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक आवश्यकताओं का ध्यान रख रहा है। परिवार का स्नेह और संरक्षण मिलने से बालक के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में हुई यह पहल बाल संरक्षण की दिशा में संवेदनशील प्रशासनिक सोच और प्रभावी समन्वय का उदाहरण है। यह प्रयास दर्शाता है कि यदि जरूरतमंद बच्चों की परिस्थितियों को समझते हुए उनके हित में सही समय पर कदम उठाए जाएं, तो उन्हें संस्थागत देखरेख के बजाय सुरक्षित पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराकर बेहतर और सम्मानजनक भविष्य की ओर बढ़ाया जा सकता है।