नारायणपुर में खेती का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की पहल, 55 हजार से अधिक भू-खंडों का होगा सर्वे
छत्तीसगढ़ में कृषि और राजस्व रिकॉर्ड को अधिक सटीक एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) को तेजी से लागू किया जा रहा है। एग्री स्टैक के तहत केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की इस पहल में मोबाइल तकनीक और सैटेलाइट इमेजरी की मदद से खेतों और फसलों का डिजिटल विवरण तैयार किया जा रहा है। सर्वे के दौरान खेत स्तर पर जाकर फसल की जानकारी दर्ज करने के साथ उसकी तस्वीर भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड की जाती है।
इसी क्रम में नारायणपुर जिले में भी डिजिटल क्रॉप सर्वे अभियान शुरू किया गया है। 17 अगस्त 2026 से प्रारंभ अभियान के तहत जिले के 176 गांवों में कुल 55,638 खसरों/प्लॉटों का डिजिटल सर्वे किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पारंपरिक गिरदावरी व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़कर कृषि भूमि और फसलों का अधिक विश्वसनीय रिकॉर्ड तैयार करना है।
मैदानी स्तर पर अधिकारियों ने परखी व्यवस्था
कलेक्टर के मार्गदर्शन में चल रहे अभियान की नियमित निगरानी की जा रही है। इसी सिलसिले में अपर कलेक्टर एवं भू-अभिलेख प्रभारी अधिकारी ने विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर सर्वे कार्य का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने सर्वेयर और सुपरवाइजरों से सीधे चर्चा कर अब तक की प्रगति की जानकारी ली। मैदानी स्तर पर सामने आ रही तकनीकी एवं व्यावहारिक दिक्कतों को समझते हुए अधिकारियों को आवश्यक समाधान और दिशा-निर्देश दिए गए, ताकि सर्वे का कार्य निर्धारित गति से जारी रहे।
30 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य
जिले में डिजिटल क्रॉप सर्वे को 30 सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभियान की शुरुआत के बाद सर्वे कार्य ने तेजी पकड़ी है और अब तक करीब 8 हजार खसरों का डिजिटल सर्वे पूरा किया जा चुका है।
प्रशासन का प्रयास है कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी चिन्हित खसरों का सर्वे पूरा कर डेटा को व्यवस्थित एवं उपयोगी डिजिटल रिकॉर्ड में परिवर्तित किया जा सके।
160 सर्वेयर और 29 सुपरवाइजर संभाल रहे जिम्मेदारी
अभियान को सफल बनाने के लिए जिले में व्यापक मैदानी व्यवस्था की गई है। कुल 160 सर्वेयर खेतों और खसरों से संबंधित जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज कर रहे हैं। इनके काम की निगरानी, सत्यापन और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 29 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं।
इसके अलावा राजस्व एवं कृषि विभाग के 21 अधिकारियों को निरीक्षण एवं मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी दी गई है। इस बहुस्तरीय व्यवस्था के माध्यम से सर्वे की गुणवत्ता के साथ-साथ कार्य की प्रगति पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।
सटीक फसल डेटा से किसानों को मिलेगा लाभ
डिजिटल क्रॉप सर्वे पूरा होने के बाद जिले में कौन-सी भूमि पर कौन-सी फसल बोई गई है, इसका अधिक सटीक और वास्तविक समय के करीब डेटा उपलब्ध हो सकेगा। इससे कृषि एवं राजस्व संबंधी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में मदद मिलेगी।
डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर किसानों को फसल बीमा, आपदा राहत, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने में सहायता मिल सकती है। साथ ही फसल संबंधी आंकड़ों के बेहतर उपलब्ध होने से प्रशासन को कृषि क्षेत्र की वास्तविक स्थिति समझने और योजनाओं की प्रभावी तैयारी में भी मदद मिलेगी।
नारायणपुर में शुरू हुआ यह अभियान पारंपरिक रिकॉर्ड व्यवस्था को डिजिटल तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रशासन की मैदानी निगरानी और सर्वे टीमों की सक्रियता से जिले में निर्धारित समय-सीमा के भीतर डिजिटल क्रॉप सर्वे पूरा करने की दिशा में कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।
