अमलीडीह गार्डन में ‘कचरा केंद्र’ बना परेशानी का कारण, जुर्माने का बोर्ड भी बेअसर
रायपुर। नगर निगम के जोन क्रमांक 10 में अधिकारी बदले, जनप्रतिनिधियों के कार्यकाल बदले, लेकिन अमलीडीह गार्डन के पास कचरा फेंके जाने की समस्या जस की तस बनी हुई है। गार्डन जैसे सार्वजनिक और मनोरंजन स्थल के समीप लंबे समय से बने कचरा फेंकने के स्थान को हटाने की दिशा में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।
सबसे दिलचस्प स्थिति यह है कि जिस जगह लोग लगातार कचरा डाल रहे हैं, उसी के पास नगर निगम की ओर से चेतावनी लिखी गई है कि यहां कचरा फेंकने पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके बावजूद मौके की स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि जब इसी स्थान पर नियमित रूप से कचरा जमा हो रहा है, तो नियमों का पालन आखिर कौन सुनिश्चित करेगा?
‘कचरा मुक्त’ जगह या निगम का तय ठिकाना?
स्थानीय लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि यहां कचरा फेंकना प्रतिबंधित है, तो फिर यह स्थान लंबे समय से कचरा जमा करने के लिए इस्तेमाल क्यों हो रहा है? चेतावनी बोर्ड और वास्तविक स्थिति के बीच का यह अंतर नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
निगम को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या यह अधिकृत कचरा संग्रहण स्थल है या फिर अनधिकृत रूप से लोग यहां कचरा फेंक रहे हैं। यदि यह प्रतिबंधित स्थान है, तो नियमित निगरानी और कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
ओपन जिम के पास कचरे का ढेर
अमलीडीह गार्डन में जिस स्थान पर कचरा डाला जा रहा है, उससे करीब 10 कदम की दूरी पर ओपन जिम बना हुआ है। यानी जिस जगह शहरवासियों को स्वास्थ्य और व्यायाम के लिए सुविधा उपलब्ध कराई गई है, उसके बेहद करीब गंदगी का अंबार नजर आ रहा है।
गार्डन में आने वाले लोगों के लिए यह स्थिति असुविधाजनक होने के साथ-साथ सार्वजनिक स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।
वरिष्ठ नागरिकों के बैठने की जगह के पास कचरा
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कचरा डाले जाने वाले स्थान से महज 5 कदम की दूरी पर वरिष्ठ नागरिकों के बैठने के लिए नगर निगम ने व्यवस्था की है।
एक तरफ बुजुर्गों के लिए शांत और स्वच्छ वातावरण में बैठने की सुविधा विकसित की गई है, वहीं दूसरी ओर उसके ठीक पास कचरा जमा होने से पूरी व्यवस्था का उद्देश्य प्रभावित होता दिखाई देता है।
बोर्ड लगा, लेकिन कार्रवाई कहां?
मौके पर 500 रुपये जुर्माने की चेतावनी वाला बोर्ड लगा है, लेकिन यदि लगातार उसी स्थान पर कचरा डाला जा रहा है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि जुर्माना लगाने की कार्रवाई कितनी प्रभावी है।
नगर निगम यदि वास्तव में इस स्थान को कचरा मुक्त करना चाहता है तो केवल चेतावनी बोर्ड लगाने के बजाय नियमित निगरानी, कचरा संग्रहण की वैकल्पिक व्यवस्था और उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई जरूरी होगी।
जिम्मेदारी तय करने की जरूरत
अमलीडीह गार्डन जैसी सार्वजनिक जगह पर स्वच्छता बनाए रखना केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि निगम की समग्र व्यवस्था से जुड़ा विषय है। कचरा संग्रहण स्थल की उपयुक्तता, नियमित उठाव, निगरानी और नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की भी है।
अब सवाल यह है कि अमलीडीह गार्डन के पास मौजूद इस कचरा स्थल को आखिर कब हटाया जाएगा? अधिकारी और पार्षद बदलते रहे, लेकिन समस्या बनी रही। क्या निगम अब इस समस्या का स्थायी समाधान करेगा या 500 रुपये जुर्माने वाला बोर्ड ही गंदगी के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराता रहेगा?
