पाकिस्तान में गृह युद्ध जैसे हालात! बलूचिस्तान के 85% हिस्से पर BLA का कब्जा, तख्तापलट कर सकते हैं आसिम मुनीर
इस्लामाबाद: पाकिस्तान की विदेश नीति भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत दिख रही हो, लेकिन देश के भीतर हालात तेजी से बेकाबू हो रहे हैं। बलूचिस्तान से लेकर खैबर-पख्तूनख्वा और PoK तक चौतरफा विद्रोह की आग भड़की हुई है।
1. बलूचिस्तान: 85% हिस्से पर नियंत्रण खोने का दावा
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BLA और TTP का दबदबा: बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने दावा किया है कि बलूचिस्तान के लगभग 85% हिस्से पर उनका नियंत्रण हो चुका है।
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सुरक्षा बलों पर हमले: बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना और पुलिस चौकियों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जिससे प्रांतीय प्रशासन का नियंत्रण पूरी तरह बेअसर साबित हो रहा है।
2. खैबर-पख्तूनख्वा (KP): कबायली बगावत और हिंसा
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सैनिकों और नागरिकों पर हमले: खैबर-पख्तूनख्वा क्षेत्र में स्थानीय कबायली गुटों और TTP के आतंकवादियों ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।
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कानून-व्यवस्था ठप: इलाके में रोजमर्रा की झड़पों और सैन्य अभियानों के कारण सामान्य जनजीवन और प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।
3. PoK में बुनियादी जरूरतों के लिए उग्र प्रदर्शन
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सड़कों पर उतरे लोग: रावलकोट सहित पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के विभिन्न शहरों में हजारों लोग सस्ते आटे, चावल, सस्ती बिजली और बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर हैं।
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सेना का दमनचक्र: प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए पाकिस्तानी सेना कड़े कदम उठा रही है। ईदगाह मैदान जैसी जगहों पर आम नागरिकों के विरोध को बलपूर्वक कुचलने की खबरें आ रही हैं।
4. सिस्टम कोलैप्स और तख्तापलट की आशंका
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गृह मंत्री की स्वीकारोक्ति: पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने खुद स्वीकार किया है कि देश का आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह “कोलैप्स” हो चुका है।
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सैन्य शासन की चर्चा: बलूचिस्तान, KP, PoK और आर्थिक बदहाली के इस 4-तरफा संकट के बीच चर्चा तेज है कि आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर इस उथल-पुथल का फायदा उठाकर औपचारिक रूप से सैन्य तख्तापलट कर सकते हैं।
5. विरोधाभास: मजबूत विदेश नीति बनाम खोखला ढांचा
पाकिस्तान ने हाल ही में सऊदी अरब और तुर्किये के साथ डिफेंस डील की है और अमेरिका-ईरान तनाव में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। हालांकि, बाहर से कूटनीतिक सफलताएं दिखाने के बावजूद पाकिस्तान अंदरूनी सुरक्षा, अलगाववादी आंदोलनों और आर्थिक बदहाली के सबसे बड़े दौर से गुजर रहा है।
