रायपुर: विशेष लेख — ढाई साल की उपलब्धियाँ: छत्तीसगढ़ की श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में नई पहचान
रायपुर, 7 अगस्त 2026:
छत्तीसगढ़ में पिछले ढाई वर्षों के दौरान श्रम विभाग ने सुरक्षा, सम्मान और समृद्धि की एक नई मिसाल कायम की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और श्रम एवं उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। योजनाओं को सुशासन, पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार से जोड़ते हुए श्रमिकों के जीवन में अभूतपूर्व सकारात्मक बदलाव लाया गया है।
1. सुशासन, पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार
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श्रमेव जयते मोबाइल ऐप व यूजर-फ्रेंडली वेबसाइट: श्रमिकों के पंजीयन, नवीनीकरण और योजनाओं के लाभ को पारदर्शी व सुलभ बनाने के लिए नई तकनीक का सहारा लिया गया है, जिससे अब ऑनलाइन आवेदन आसान हो गया है।
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24×7 मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र: श्रमिकों की सहायता और शिकायतों के निवारण हेतु 24 घंटे, सातों दिन हेल्पलाइन व सहायता केंद्र संचालित किया जा रहा है। दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल शिविर लगाकर लाखों श्रमिकों की समस्याओं का समाधान मौके पर ही किया गया है।
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प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT): सभी योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों के बैंक खातों में सीधी राशि भेजकर पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है।
2. प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण और नए कार्यालय
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5 नए जिलों में श्रम कार्यालय: मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर तथा सक्ती में नए श्रम अधिकारी कार्यालयों की स्थापना हेतु 20 पदों का सृजन किया गया है।
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सभी 33 जिलों में विस्तार: वर्तमान में राज्य के सभी 33 जिलों में श्रम कार्यालय (10 सहायक श्रमायुक्त व 23 श्रम अधिकारी कार्यालय) पूर्ण रूप से सक्रिय हैं।
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श्रमिक अधिकारों का संरक्षण: दुकानों एवं स्थापना अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन, फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट, महिला श्रमिकों के लिए रात्रिकालीन कार्य की अनुमति और फैक्टरी लाइसेंस अवधि विस्तार जैसे सुधारों से औद्योगिक संतुलन और रोजगार सृजन बढ़ा है।
3. पंजीयन और 800 करोड़ से अधिक का हितलाभ वितरण
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12.65 लाख नए पंजीयन: 1 जनवरी 2024 से 30 जून 2026 के मध्य लगभग 12.65 लाख नए श्रमिकों को पंजीकृत किया गया।
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17.82 लाख श्रमिक लाभान्वित: इस अवधि में विभिन्न 67 कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से लगभग 17.82 लाख श्रमिकों को 800 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की गई।
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निर्माण श्रमिक: लगभग 780 करोड़ रुपये की सहायता।
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असंगठित श्रमिक: लगभग 187 करोड़ रुपये की सहायता।
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4. महिला कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और भोजन व्यवस्था
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आवास सहायता राशि में बढ़ोतरी: ‘मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना’ के तहत मिलने वाली राशि को बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये किया गया है।
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मिनीमाता महतारी जतन योजना: निर्माण व असंगठित क्षेत्र की 1.60 लाख से अधिक महिला श्रमिकों को मातृत्व सहायता का लाभ दिया गया।
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शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना: पंजीकृत श्रमिकों को मात्र 5 रुपये में पौष्टिक व गर्म भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
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शिक्षा व छात्रवृत्ति: मेधावी बच्चों के लिए निःशुल्क प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग, छात्रवृत्ति और मेधावी शिक्षा सहायता योजनाओं का प्रभावी संचालन किया जा रहा है।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की जनकल्याणकारी सोच और सुशासन के कारण छत्तीसगढ़ आज देश में श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य बनकर उभरा है। ढाई वर्षों की यह उपलब्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लाखों श्रमिक परिवारों के जीवन में आई सुरक्षा, स्वाभिमान और समृद्धि का ठोस प्रमाण है।
