रायपुर: निगम सीमा खत्म होते ही शुरू होता है भू-माफियाओं का साम्राज्य, सस्ती जमीन और अवैध कॉलोनियों का बड़ा खेल उजागर

रायपुर।

राजधानी रायपुर की नगर निगम सीमा से लगे आउटर और ग्रामीण अंचलों में भू-माफियाओं का साम्राज्य धड़ल्ले से चल रहा है। सस्ती जमीन और भविष्य में नगर निगम सीमा में शामिल होने का झांसा देकर भू-माफिया लोगों को अवैध प्लाटिंग का शिकार बना रहे हैं।

मीडिया पड़ताल में खुलासा हुआ है कि छेरीखेड़ी खार, परसुलीडीह, कांदुल और सेजबहार जैसे इलाकों में बिना मूलभूत सुविधाओं और पक्की सड़कों के अवैध बसाहटें खड़ी की जा रही हैं।

छेरीखेड़ी खार और परसुलीडीह का हाल

  • छेरीखेड़ी खार: जोरा से छेरीखेड़ी जाने वाले कच्चे रास्ते पर करीब 8 एकड़ से अधिक जमीन पर अवैध प्लाटिंग चल रही है। यहाँ 2,000 से 2,200 रुपये प्रति वर्गफीट के हिसाब से जमीन बेची जा रही है। बारिश में रास्ते पूरी तरह दलदल में बदल जाते हैं, फिर भी कई मकान और गोदाम खड़े हो चुके हैं।

  • परसुलीडीह (सड्डू के पास): पंचायत क्षेत्र में पिछले दो सालों में 70 से 80 मकान बन चुके हैं। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने अप्रैल में कार्रवाई कर निर्माण रुकवाया था, लेकिन माफिया ने कुछ ही दिनों बाद फिर से बिक्री शुरू कर दी।

पुराना धमतरी रोड में छतरी लगाकर बैठे एजेंट

पुराना धमतरी रोड, कांदुल और सेजबहार क्षेत्रों में भू-माफियाओं ने 999 रुपये से लेकर 2,000 रुपये प्रति वर्गफीट में जमीन देने के लुभावने पोस्टर लगा रखे हैं। मुख्य सड़कों पर छतरी लगाकर एजेंट बैठ रहे हैं और ग्राहकों को फंसा रहे हैं।

विभागीय सीमा विवाद का फायदा उठा रहे भू-माफिया

प्रभावी कार्रवाई न होने की सबसे बड़ी वजह नगर निगम, नगर एवं ग्राम निवेश (T&CP) और एनआरडीए (NRDA) का सीमा विवाद है।

  • पार्षद रेणू जयंत साहू का कहना है कि निगम सीमा से बाहर होने के कारण कार्रवाई में हाथ बंधे रहते हैं, जबकि लोग सड़कों की मांग लेकर आते हैं।

  • उपसंचालक (T&CP) विनीत नायर के अनुसार, शिकायत मिलने पर नोटिस जारी किए जाते हैं, वहीं छेरीखेड़ी एनआरडीए क्षेत्र में आता है जहाँ संबंधित एजेंसी को कार्रवाई करनी होती है।

  • नगर निवेशक आभास मिश्रा ने बताया कि निगम सीमा के भीतर अवैध प्लाटिंग पर बीते वर्ष 329 और इस वर्ष 150 से अधिक मामलों में सख्त कार्रवाई की गई है।