‘स्पाई फाइल्स’ ऑपरेशन बांग्लादेश (Part-1): जब सैम मानकशॉ ने इंदिरा गांधी से कहा— “अभी जंग लड़े तो हार की 100% गारंटी है”

नई दिल्ली।

वर्ष 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध इतिहास के सबसे सफल और रणनीतिक सैन्य अभियानों में गिना जाता है। इस युद्ध के परिणामस्वरूप दुनिया के नक्शे पर एक नए राष्ट्र ‘बांग्लादेश’ का जन्म हुआ। हालांकि, इस ऐतिहासिक जीत के पीछे एक ऐसा रणनीतिक फैसला था, जिसने पूरे युद्ध का रुख बदल दिया।

1. 1971 का मानवीय संकट और शरणार्थियों का सैलाब

1971 के शुरुआती महीनों में पाकिस्तानी सेना (जनरल याह्या खान और ‘बुचर ऑफ बंगाल’ जनरल टिक्का खान के आदेश पर) ने पूर्वी पाकिस्तान की बंगाली आबादी, बुद्धिजीवियों और महिलाओं पर अमानवीय अत्याचार शुरू किए।

हिंसा से अपनी जान बचाकर लगभग 1 करोड़ बंगाली शरणार्थी भारत के सीमावर्ती राज्यों (पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और असम) में शरण लेने पहुंचे। इससे भारत पर भारी आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षात्मक दबाव बन गया।

2. इंदिरा गांधी और सैम मानकशॉ की वो ऐतिहासिक बैठक

शरणार्थी संकट गहराने पर अप्रैल 1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कैबिनेट की आपातकालीन बैठक बुलाई और थल सेनाध्यक्ष जनरल सैम मानकशॉ से तुरंत पूर्वी पाकिस्तान में सेना भेजने का आग्रह किया।

  • इंदिरा गांधी का रुख: “हमें तुरंत कार्रवाई करनी होगी और पूर्वी पाकिस्तान में सेना दाखिल करनी होगी।”

  • सैम मानकशॉ का बेबाक इनकार: जनरल मानकशॉ ने उस समय युद्ध शुरू करने से स्पष्ट मना कर दिया।

जब मानकशॉ ने पूछा— “क्या आपने बाइबल पढ़ी है?”

सैम मानकशॉ ने प्रधानमंत्री से मुस्कुराते हुए कहा— “मैडम, क्या आपने बाइबल पढ़ी है?” (बाइबल के संदर्भ में कि हर काम का एक सही समय होता है)।

उन्होंने सैन्य दृष्टिकोण से समझाया:

  • अप्रैल-मई में मानसून आने वाला है, जिससे पूर्वी पाकिस्तान की नदियां उफान पर होंगी और भारतीय टैंक दलदल में फंस जाएंगे।

  • गर्मियों में हिमालय के दर्रे खुलने से चीन द्वारा उत्तर भारत से हमला करने का बड़ा खतरा रहेगा।

  • मानकशॉ ने बेबाकी से कहा— “अगर आप अभी युद्ध चाहती हैं, तो आपकी हार की 100% गारंटी है। लेकिन अगर आप मुझे तैयारी के लिए कुछ महीनों का समय दें, तो मैं जीत की 100% गारंटी देता हूँ।”

3. ‘ऑपरेशन बांग्लादेश’ की स्वर्णिम सफलता

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सेना प्रमुख के पेशेवर मूल्यांकन और क्षमता पर पूरा भरोसा जताया। भारतीय सेना को पूरी तैयारी के लिए 7-8 महीने (दिसंबर 1971 तक) का समय दिया गया।

इस दौरान भारतीय सेना ने ट्रेनिंग, रसद एकत्र करने और बंगाली स्वतंत्रता सेनानियों (मुक्ति वाहिनी) को तैयार करने का काम किया।

जब 3 दिसंबर 1971 को युद्ध शुरू हुआ, तो मात्र 13 दिनों में भारतीय सेना ने पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया। 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने ऐतिहासिक आत्मसमर्पण किया और बांग्लादेश का जन्म हुआ।