राष्ट्रपति भवन के विशेष अतिथि बने बस्तर के मांझी-चालकी: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्वयं भोजन परोसकर किया सम्मान

रायपुर (UPI24 News)। बस्तर की लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं और सामाजिक नेतृत्व ने देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच राष्ट्रपति भवन में इतिहास रच दिया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकारों, पारंपरिक जनजातीय मांझी-चालकी व्यवस्था के प्रतिनिधियों और पद्मश्री सम्मानित हस्तियों सहित 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का दौरा किया।

इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने सभी अतिथियों के सम्मान में विशेष भोज का आयोजन किया। भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में एक आत्मीय दृश्य तब दिखा, जब राष्ट्रपति ने स्वयं सभी अतिथियों को भोजन परोसा।

कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण और बातें:

  • झिटकू-मिटकी कलाकृति भेंट: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति को बस्तर की 300 वर्ष पुरानी प्रेम और लोकआस्था की प्रतीक ‘झिटकू-मिटकी’ पर आधारित ढोकरा कलाकृति भेंट की।

  • बस्तर आने की जताई इच्छा: मुख्यमंत्री के आमंत्रण पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने भविष्य में बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में शामिल होने की इच्छा जाहिर की। उन्होंने बताया कि उनके पिता भी मांझी थे और मांझी व्यवस्था उनके परिवार जैसी है।

  • बस्तर में शांति और विकास: राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि बस्तर आज शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • अमित शाह की प्रतिक्रिया: केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति भवन में पहली बार बस्तर की पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में इतना बड़ा प्रतिनिधिमंडल देखा है, जो जनजातीय गौरव का प्रतीक है।

प्रतिनिधिमंडल में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सहित वरिष्ठ अधिकारी व जनप्रतिनिधि शामिल रहे।