छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला: शादी का दबाव बनाना और मानसिक प्रताड़ना भी ‘आत्महत्या के लिए उकसाना’, निचली अदालत का फैसला पलटा
बिलासपुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (High Court of Chhattisgarh) ने आत्महत्या के एक मामले में महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत (Lower Court) के बरी करने के आदेश को निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति को लगातार प्रताड़ित करना और उस पर अनुचित दबाव बनाना कानूनन अपराध है।
IPC की धारा 306 के तहत माना अपराध
मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने माना कि लगातार मानसिक प्रताड़ना, धमकी देना और शादी का जबरन दबाव बनाना भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 (Section 306 – Abetment of Suicide) के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने की श्रेणी में आता है।
निचली अदालत का फैसला पलटा
इससे पहले निचली अदालत ने आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में प्रस्तुत तथ्यों और परिस्थितियों का गहराई से अवलोकन करने के बाद निचली अदालत के फैसले को पलट दिया और आरोपी को दोषी ठहराया।
उच्च न्यायालय का यह फैसला आत्महत्या के मामलों में प्रताड़ना और मानसिक दबाव की वैधानिक परिभाषा को लेकर एक बड़ा नजीर (Precedent) साबित होगा।
