निगम की नाक के नीचे दब गए नाले: छोकरा-अरमान नाले का 18 साल पहले हुआ था सीमांकन, अब तक नहीं हटाए गए 95 अवैध कब्जे
रायपुर, 18 जुलाई 2026
राजधानी रायपुर में मानसून की पहली ही तेज बारिश ने नगर निगम के दावों की पोल खोलकर रख दी है। पहली बारिश में ही पूरा शहर जलमग्न हो गया, सड़कों पर समंदर जैसा नजारा दिखा और कई रिहायशी इलाकों के घरों में पानी घुस गया। इस भीषण जलभराव की इनसाइड स्टोरी बेहद चौंकाने वाली है। ग्राउंड रियलिटी यह है कि रायपुर में नालों पर अवैध कब्जा होने के कारण शहर का ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह चोक हो चुका है। शहर के दो प्रमुख नालों—’अरमान’ और ‘छोकरा’—पर 95 से अधिक अवैध निर्माण हैं, जिसकी वजह से कई वार्डों का पानी आगे नहीं निकल पा रहा है।
18 साल से फाइलों में दबी है कार्रवाई
इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन दोनों प्रमुख नालों से अतिक्रमण हटाने के लिए पहली बार साल 2008 में सीमांकन (Demarcation) कराया गया था। विडंबना देखिए कि करीब 18 साल बीत जाने के बाद भी नगर निगम इन अवैध कब्जों को हटाने में नाकाम रहा है। अतिक्रमणकारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि कई जगहों पर 10 फीट चौड़ा नाला सिमटकर महज 4 फीट का रह गया है।
जनता और पार्षदों के भारी विरोध के बाद नगर निगम ने जुलाई 2026 में एक बार फिर से कार्रवाई की फाइलें दौड़ानी शुरू की हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर एक्शन कब और कैसे होगा, यह अब भी तय नहीं है।
अरमान नाला: 10 फीट की चौड़ाई सिमटकर हुई 4 फीट
राजातालाब की ओर से आने वाला अरमान नाला पंडरी वार्ड से होते हुए शंकर नगर में प्रवेश करता है। इन दोनों ही वीआईपी वार्डों में नाले के ऊपर करीब 95 अवैध मकान तान दिए गए हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि साल-दर-साल निगम के अधिकारियों की नाक के नीचे ये कब्जे होते रहे और ज़िम्मेदार आंखें मूंदे बैठे रहे।
छोकरा नाला: ट्रकों से मुरुम गिराकर खुलेआम पाटा जा रहा
शहर के दूसरे बड़े ‘छोकरा नाले’ की स्थिति और भी बदतर है। कचना पुल के पास एक रसूखदार व्यक्ति ने बकायदा बाउंड्रीवाल खड़ी कर और ट्रकों से मुरुम डंप करवाकर नाले को ही पाट दिया है। इसकी शिकायत 5 महीने पहले की गई थी, लेकिन निगम प्रशासन ने “सीमांकन रिपोर्ट नहीं होने” का बहाना बनाकर जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया। अब जब रिहायशी इलाकों में पानी भरा है, तो निगम ने सड्डू और अंबुजा मॉल के आगे बने तीन अतिक्रमणों को हटाने के लिए राजस्व विभाग को नई चिट्ठी लिखी है।
सीधी बात: संबित मिश्रा (निगम आयुक्त)
सवाल: दोनों नालों पर 95 अवैध कब्जे अब तक क्यों नहीं हटाए गए?
जवाब: सीमांकन रिपोर्ट मांगी गई है, रिपोर्ट मिलते ही कार्रवाई शुरू की जाएगी।
सवाल: 2018 से फाइलें चल रही हैं, फिर भी एक्शन क्यों नहीं हुआ?
जवाब: पहले क्या हुआ, उस पर मैं टिप्पणी नहीं कर सकता क्योंकि वह मेरे कार्यकाल का मामला नहीं है। अब कार्रवाई तय है।
सवाल: जो कार्रवाई बारिश से पहले होनी थी, वो अब जलभराव के बाद क्यों हो रही है?
जवाब: अवैध पाटों को लगातार हटाया जा रहा है और नालों की सफाई भी जारी है। जनता को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
जिम्मेदारों के अलग-अलग राग
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स्थायी समाधान के बिना राहत नहीं: “अरमान नाले में हुए अवैध कब्जों को कोई भी निगम सरकार नहीं हटा पाई है। यही वजह है कि बार-बार कई वार्डों में पानी भर रहा है।”
– राजेश गुप्ता, पार्षद (शंकर नगर वार्ड)
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दोबारा भेजा गया है प्रस्ताव: “अरमान नाले में पंडरी और शंकरनगर वार्ड में सबसे ज्यादा अतिक्रमण हुआ है। इसे हटाने के लिए दोबारा नाले से अतिक्रमण हटाने का प्रस्ताव दिया गया है।”
– प्रीति सिंह, आयुक्त (जोन-3)
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राजस्व विभाग से रिपोर्ट का इंतजार: “छोकरा नाला पर अतिक्रमण के पुराने मामले में सीमांकन रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली है। नए सिरे से रिपोर्ट तैयार करने के लिए राजस्व विभाग को कहा गया है।”
– राकेश शर्मा, आयुक्त (जोन-9)
