रायपुर में सत्यापन के दौरान चौंकाने वाला खुलासा: हर महीने मिल रही हैं डॉक्टरों की फर्जी डिग्रियां, जांच में फंसी मार्कशीट
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से स्वास्थ्य व्यवस्था और चिकित्सा जगत को हिलाकर रख देने वाला एक बड़ा खुलासा हुआ है। मेडिकल काउंसिल और स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जा रहे डिग्रियों के सत्यापन (वेरिफिकेशन) के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक डेटा सामने आया है। प्रदेश में लोगों के इलाज का जिम्मा संभालने वाले कई डॉक्टरों और स्टाफ की डिग्रियां ही फर्जी पाई गई हैं, जिसके बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
हर 30 डिग्रियों में से 5 डिग्रियां फर्जी
स्वास्थ्य विभाग और छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, रायपुर में जांच के लिए आने वाले दस्तावेजों की स्क्रूटनी में लगातार बड़े फर्जीवाड़े पकड़े जा रहे हैं। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि जांच के लिए आने वाली हर 30 डिग्रियों में से औसतन 5 डॉक्टरों, पैरा-मेडिकल और नर्सिंग स्टाफ की डिग्रियां और मार्कशीट पूरी तरह से फर्जी निकल रही हैं।
यह स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में जाली दस्तावेजों के सहारे एंट्री करने का एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है।
मरीजों की जान के साथ खिलवाड़: नर्सिंग और पैरा-मेडिकल स्टाफ भी शामिल
इस वेरिफिकेशन अभियान में सिर्फ डॉक्टरों की ही नहीं, बल्कि अस्पतालों में रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले पैरा-मेडिकल और नर्सिंग स्टाफ के प्रमाण पत्र भी जाली पाए गए हैं। बिना किसी उचित योग्यता और ट्रेनिंग के, सिर्फ फर्जी मार्कशीट के दम पर अस्पतालों में काम कर रहे ये लोग सीधे तौर पर आम जनता और मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
प्रशासन हुआ सख्त, दर्ज होगी एफआईआर (FIR)
इस बड़े खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल काउंसिल बेहद गंभीर रुख अपना रहे हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जिन भी लोगों के दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।
संबंधित थानों में इन फर्जी डिग्री धारकों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी (जालसाज दस्तावेज तैयार करने) की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। इसके साथ ही, जिन संस्थानों से ये डिग्रियां जारी होना दिखाई गई हैं, उनसे भी बैक-वेरिफिकेशन कराया जा रहा है ताकि इस पूरे रैकेट की तह तक पहुँचा जा सके।
