रायपुर कंज्यूमर कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: E-20 पेट्रोल से कार का इंजन हुआ खराब, मारुति सुजुकी नई कार दे या 20.5 लाख रुपए लौटाए; देश का पहला मामला
रायपुर: पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (E20) के इस्तेमाल को लेकर देश में जारी बहस के बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक बेहद चौंकाने वाला और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। रायपुर उपभोक्ता फोरम (कंज्यूमर कोर्ट) ने E-20 पेट्रोल के कारण कार का इंजन खराब होने के मामले में मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उसके अधिकृत डीलर को जिम्मेदार ठहराया है। कोर्ट ने पीड़ित ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को नई कार देने या 20.5 लाख रुपए से अधिक की पूरी रकम ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है।
ई-20 ईंधन से कार खराब होने पर ग्राहक को मुआवजा देने का यह देश का पहला मामला है, जिससे ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला? 5 बार ठीक कराने पर भी जमी सफेद परत
रायपुर के डॉ. प्रेमराज देबता ने जून 2024 में मारुति सुजुकी की नेक्सा डीलरशिप से ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जेटा प्लस कार खरीदी थी। डीलर ने कार का निर्माण दिसंबर 2023 बताया था, जबकि कोर्ट के रिकॉर्ड से पता चला कि कार जनवरी 2023 में बनी थी।
रोजाना 150 से 200 किलोमीटर का सफर करने वाले डॉ. देबता की कार 5 महीने बाद अचानक ‘इंजन मालफंक्शन’ का अलर्ट देकर बंद हो गई। डीलरशिप ने इसे मिलावटी पेट्रोल बताकर पल्ला झाड़ लिया। पीड़ित ने 5 बार गाड़ी ठीक करवाई, लेकिन हर बार फ्यूल टैंक और पाइपलाइन में दही जैसी सफेद परत और तरल पदार्थ जमा हो जाता था। अंत में कंपनी ने ई-मेल कर कहा कि इंजन पूरी तरह ठप हो चुका है और इसे बदलने में 5.30 लाख रुपए का खर्च आएगा, जो वारंटी में कवर नहीं होगा। इसके बाद पीड़ित ने मार्च 2025 में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सरकारी लैब की रिपोर्ट से खुली पोल
मामले की सुनवाई के दौरान पेट्रोल के नमूनों की जांच एसजीएस (SGS) लैब में कराई गई। रिपोर्ट में यह साफ हो गया कि ईंधन E20 श्रेणी का ही था, लेकिन पेट्रोल में एथेनॉल समान रूप से नहीं घुल पाया और नमी के कारण वह अलग होकर नीचे सफेद परत के रूप में जमा हो गया था। उपभोक्ता आयोग ने माना कि गाड़ी का इंजन E20 ईंधन के अनुरूप (कंप्लायंट) नहीं था, फिर भी डीलर ने उपभोक्ता को धोखे से ऐसी कार बेच दी।
कंज्यूमर कोर्ट का सख्त आदेश: नई कार दें या पूरे पैसे लौटाएं
14 जुलाई 2026 को उपभोक्ता फोरम ने पीड़ित के पक्ष में कड़ा फैसला सुनाते हुए निम्नलिखित आदेश जारी किए:
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45 दिनों के भीतर ग्राहक को उसी मॉडल की नई E20 अनुकूल (Compliant) कार दी जाए।
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ऐसा न करने पर वाहन की पूरी कीमत (करीब 20.5 लाख रुपए), आरटीओ पंजीकरण, बीमा और अन्य सभी खर्च लौटाने होंगे।
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मानसिक प्रताड़ना के लिए 1 लाख रुपए और केस खर्च के लिए 10 हजार रुपए अतिरिक्त देने होंगे।
ऑटो एक्सपर्ट और कंपनी का क्या है कहना?
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एक्सपर्ट की राय: ऑटो विशेषज्ञ के. महेश कुमार के अनुसार, यदि एथेनॉल में थोड़ी भी नमी हो तो वह पेट्रोल में नहीं घुलता क्योंकि दोनों की डेंसिटी अलग होती है। इससे गाड़ी का फ्यूल पंप और पूरा फ्यूल सिस्टम ब्लॉक हो जाता है।
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कंपनी का दावा: मारुति सुजुकी के कॉर्पोरेट अफेयर्स के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती ने शंकाओं को खारिज करते हुए दावा किया कि 2023 से पहले बनी उनकी कारों में भी E20 ईंधन से कोई नुकसान, जंग या घिसाव (वियर एंड टियर) नहीं होता है क्योंकि उनमें पर्याप्त सुरक्षा मानक दिए गए हैं। हालांकि, कोर्ट ने कंपनी के इस तर्क को अमान्य कर दिया।
