अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस: गुजरात हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, 38 दोषियों की मौत की सजा बरकरार; कोर्ट ने कहा- इन्हें कोई पछतावा नहीं
अहमदाबाद/नई दिल्ली: गुजरात हाईकोर्ट ने आज देश के न्यायिक इतिहास में एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने साल 2008 में हुए विनाशकारी अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट (Ahmedabad Serial Blasts) मामले में निचली अदालत द्वारा दी गई 38 दोषियों की मौत की सजा (Death Sentence) को पूरी तरह से बरकरार रखा है। भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में यह अब तक की सबसे बड़ी सामूहिक मृत्युदंड (Mass Death Penalty) की पुष्टि में से एक है।
56 बेगुनाहों की गई थी जान, हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी
सजा की पुष्टि करते हुए गुजरात हाईकोर्ट ने बेहद सख्त और तल्ख टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि इन दोषियों के मन में अपने इस खौफनाक कृत्य को लेकर रत्ती भर भी पछतावा नहीं था।
गौरतलब है कि 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में महज 70 मिनट के भीतर एक के बाद एक 21 बम धमाके हुए थे। इस आतंकी हमले ने पूरे देश को दहला दिया था। इन धमाकों में 56 बेगुनाह लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि 240 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
न्यायिक इतिहास का सबसे बड़ा फैसला
विशेष अदालत ने फरवरी 2022 में इस मामले के 49 दोषियों में से 38 को फांसी की सजा सुनाई थी, जिस पर अब गुजरात हाईकोर्ट ने भी अपनी अंतिम मुहर लगा दी है। कानून के जानकारों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर आतंकियों या अपराधियों की फांसी की सजा बरकरार रखने का यह देश का पहला और ऐतिहासिक मामला है।
